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जब मंदिर पर बुलडोजर चलाने से सहमा ड्राइवर, तो नायब तहसीलदार ने खुद उठाई हथौड़ी, हाथ जोड़े खड़ी रहीं SDM...

जब मंदिर पर बुलडोजर चलाने से सहमा ड्राइवर, तो नायब तहसीलदार ने खुद उठाई हथौड़ी, हाथ जोड़े खड़ी रहीं SDM...

सीतापुर, ब्यूरो। जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत कैप्टन मनोज पांडेय चौराहे के चौड़ीकरण की जद में आए 25 साल पुराने दुर्गा मंदिर को रविवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया।इस प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कई भावनात्मक और संवेदनशील पल देखने को मिले। मंदिर के ढांचे को तोड़ने के लिए जब सरकारी बुलडोजर ड्राइवर ने इनकार कर दिया, तो नायब तहसीलदार ने खुद छेनी-हथौड़ी उठाकर स्थापित प्रतिमा को जमीन से अलग किया। इस दौरान उपजिलाधिकारी (SDM) हाथ जोड़े खड़ी रहीं, जिसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

सरकारी ड्राइवर ने किया इनकार, प्राइवेट से तोड़ा गया मंदिर

जानकारी के अनुसार, चौराहे के चारों ओर 150-150 मीटर तक सड़क चौड़ीकरण का 3 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट स्वीकृत है। सुबह करीब 10 बजे एडीएम नीतीश कुमार, एसडीएम दामिनी एस. दास और नायब तहसीलदार महेंद्र तिवारी बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने संविदा ड्राइवर सुशील को मंदिर तोड़ने का निर्देश दिया, लेकिन उसने धार्मिक आस्था का हवाला देकर इनकार कर दिया। दबाव बनाने के बावजूद वह टस से मस नहीं हुआ। अंततः राजस्व टीम ने एक प्राइवेट ड्राइवर को बुलवाया, जिसने करीब 1:30 बजे पहुंचकर 5 मिनट में मंदिर का ढांचा जमींदोज कर दिया।

नायब तहसीलदार ने निकाली मूर्ति, SDM खड़ी रहीं हाथ जोड़े

मंदिर ढहाए जाने से पूर्व स्थापित दुर्गा जी की प्रतिमा को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी नायब तहसीलदार महेंद्र तिवारी ने खुद संभाली। उन्होंने छेनी-हथौड़ी लेकर प्रतिमा को जमीन से अलग किया और उसे पास के 'शक्ति मंदिर' में सुरक्षित भिजवाया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एसडीएम दामिनी एस. दास पास ही श्रद्धा भाव से हाथ जोड़े खड़ी रहीं, जिसे कुछ लोग उनकी धार्मिक संवेदनशीलता मान रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक मजबूरी।

खरमास में कार्रवाई से स्थानीय लोगों में आक्रोश

प्रशासनिक दावों के विपरीत, मंदिर तोड़े जाने से स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासी अखिलेश पांडेय ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी क्योंकि खरमास चल रहा है, लेकिन खरमास में ही मूर्ति को हटा दिया गया। हालांकि, एडीएम नीतीश सिंह का कहना है कि पुजारी और स्थानीय लोगों की सहमति के बाद ही मंदिर हटाया गया है और दो दिन के भीतर मूर्ति को नई जगह पर विधिवत स्थापित कर दिया जाएगा।

शहर के हृदय स्थल 'कैप्टन मनोज पांडे चौराहा' के कायाकल्प के लिए शुरू हुआ 3 करोड़ रुपये का सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट अब आस्था और विकास के बीच टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। रविवार को 25 साल पुराने दुर्गा मंदिर को ढहाए जाने के बाद शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे रूट पर करीब 15 अन्य छोटे-बड़े धार्मिक स्थल (मंदिर और मजार) चिह्नित किए गए हैं, जो सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में बाधा बन रहे हैं।

आगामी चुनौतियां: मंदिर और मजारों की शिफ्टिंग नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग (PWD) की संयुक्त टीम ने चौराहे से चारों दिशाओं में 150-150 मीटर तक का जो खाका खींचा है, उसमें कई प्राचीन देवस्थान आ रहे हैं।

पुनर्वास की मांग: स्थानीय निवासियों और पुजारियों की मांग है कि केवल मूर्ति हटाना समाधान नहीं है, बल्कि प्रशासन को भव्य मंदिर निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि भी आवंटित करनी चाहिए।

सामुदायिक सामंजस्य: सड़क के दूसरी ओर स्थित कुछ पुराने चबूतरों और मजारों को लेकर भी नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी अतिक्रमण हटाए, ताकि शहर का सुंदरीकरण पारदर्शी तरीके से हो सके।

विकास की जरूरत बनाम पुरानी यादें 

कैप्टन मनोज पांडे चौराहा सीतापुर की लाइफ लाइन है। यहां लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए सड़क का चौड़ा होना अनिवार्य है। लेकिन वर्षों पुराने इन धार्मिक स्थलों से लोगों की गहरी भावनाएं जुड़ी हैं। एडीएम नीतीश सिंह का कहना है कि प्रशासन "संवाद और सहमति" के मॉडल पर काम कर रहा है, ताकि विकास की गति न रुके और शांति व्यवस्था भी बनी रहे।