Headlines
Loading...
क्या भारत में लागू होगा Work From Home? LPG संकट के बीच सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, स्कूल भी हो सकते हैं बंद...

क्या भारत में लागू होगा Work From Home? LPG संकट के बीच सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, स्कूल भी हो सकते हैं बंद...

Work From Home Mandatory: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब धीरे-धीरे भारत की रोजमर्रा की जिंदगी और कॉर्पोरेट सेक्टर तक पहुंचने लगा है। रसोई गैस की सप्लाई में आई बाधाओं के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार कुछ समय के लिए अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम (Mandatory Work From Home) लागू कर सकती है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा संकट गहराता है तो ईंधन बचाने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। ऐसा में भी हो सकता है कि स्कूल ऑफलाइन ना चलकर अब ऑनलाइन चले।

इसी बीच देश की बड़ी आईटी कंपनी HCLTech ने चेन्नई स्थित अपने ऑफिस में कर्मचारियों को 12 और 13 मार्च को घर से काम करने का विकल्प दिया है। वजह यह रही कि एलपीजी की कमी के कारण ऑफिस कैफेटेरिया चलाने वाले कई वेंडर काम नहीं कर पा रहे थे।

मिंट के मुताबिक HCLTech से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कैफेटेरिया में खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। कई कैटरिंग वेंडर एलपीजी की कमी के कारण अपनी सेवाएं जारी नहीं रख सके। ऐसे में कर्मचारियों को परेशानी से बचाने के लिए कंपनी ने अस्थायी तौर पर वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी। यह घटना दिखाती है कि गैस संकट अब सिर्फ रेस्टोरेंट या होटल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों की दैनिक व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है।

स्कूलों पर भी पड़ सकता है असर (Remote Study for Schools)

फाइनेंस और बिजनेस एक्सपर्ट सार्थक आहूजा (Sarthak Ahuja) का कहना है कि अगर ऊर्जा संकट और बढ़ा तो कुछ समय के लिए स्कूलों को भी ऑनलाइन पढ़ाई (Remote Study) पर शिफ्ट किया जा सकता है।

उनका तर्क है कि कई देशों ने पहले ही ईंधन बचाने के लिए यात्रा और ऑफिस उपस्थिति कम करने जैसे कदम उठाए हैं। अगर स्थिति गंभीर होती है तो भारत में भी कुछ दिनों के लिए स्कूल बंद कर ऑनलाइन क्लासेज कराई जा सकती हैं।क्या भारत में लागू होगा वर्क फ्रॉम होम? क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सार्थक आहूजा का कहना है,

''सरकार आने वाले कुछ दिनों के लिए भारत में अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम का ऐलान कर सकती है। एनर्जी संकट को देखते हुए थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों ने कंपनियों को सलाह दी है कि कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा घर से काम करने दें और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचें। इन देशों का मकसद ईंधन की खपत कम करना है, क्योंकि वैश्विक संघर्ष के चलते तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।''

उन्होंने कहा, ''जेट फ्यूल की कमी की वजह से फ्लाइट टिकट की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं और लोगों से कहा जा रहा है कि अनावश्यक यात्रा से बचें। आने वाले समय में स्कूलों को भी कुछ दिनों के लिए बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। इसलिए लोगों को अभी से ईंधन के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।''इंस्टाग्राम पर शेयर अपने वीडियो में सार्थक आहूजा ने कहा,

''दरअसल युद्ध की वजह से तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, इसलिए दुनिया के कई देश ईंधन बचाने के लिए कदम उठा रहे हैं। खबरें यह भी हैं कि भारत सरकार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने जा रही है। इसका मतलब यह है कि अगर आप रेस्टोरेंट, होटल या किसी फूड बिजनेस से जुड़े हैं तो एलपीजी की उपलब्धता में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में ऊर्जा की खपत कम करने वाले विकल्पों की ओर जाना जरूरी होगा। मुझे लगता है कि सरकार जल्द ही वर्क फ्रॉम होम को लेकर भी कोई फैसला ले सकती है।''

आम लोगों के लिए क्या सलाह? (Energy Saving Advice)

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अभी से ईंधन की बचत पर ध्यान देना चाहिए। गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी रखें।

कुल मिलाकर, यह संकट सिर्फ गैस सिलेंडर या ऑफिस कैफेटेरिया तक सीमित नहीं है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई और ईंधन बचाने जैसे बड़े फैसले देशभर में देखने को मिल सकते हैं।

भारत में LPG की सप्लाई का क्या हाल? (LPG Supply Situation)

सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को मिलने वाली गैस में कटौती कर रही है। इसका असर सबसे ज्यादा रेस्टोरेंट, होटल और ऑफिस कैफेटेरिया पर पड़ रहा है।

हाल ही में देशभर में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹60 बढ़ाई गई है। वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर ₹144 महंगे हो गए हैं। इससे होटल और फूड बिजनेस पर दबाव बढ़ गया है।

इस पूरे संकट का एक और बड़ा पहलू है खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय। खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) के देशों में करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं।

इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और ओमान फारस की खाड़ी और बहरीन शामिल हैं। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो वहां की आर्थिक गतिविधियों और भारतीय कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।