विधायक की बारात में गए, भोज खाया और सेट हो गये 4 विधायक... बहुमत साबित करने का ये नीतीश का अनोखा जुगाड़...
बिहार राज्य, ब्यूरो। संसदीय राजनीति में हर नई सरकार को फ्लोर टेस्ट पास करना पड़ता है। सदन में ही तय होता है कि किसी सरकार को बहुमत हासिल है या नहीं। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को सदन में विश्वास मत हासिल कर लिया। वक्त इंसान को क्या अजीब मोड़ पर ला खड़ा करता है।
आज से 13 साल पहले उन्होंने इसी सदन में नीतीश कुमार के विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट डाला था। उस समय सम्राट चौधरी राजद के विधायक थे। भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद नीतीश सरकार अल्पमत में आ गयी थी। तब नीतीश कुमार ने अपना बहुमत साबित करने के लिए 19 जून 2013 को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कैसे विश्वास मत हासिल किया, इसकी एक दिलचस्प कहानी है।
2013 में नीतीश सरकार आ गई थी अल्पमत में
उस समय जदयू के 117 विधायक थे। बहुमत का आंकड़ा 122 था। नीतीश कुमार को बहुमत के लिए 5 और विधायक चाहिए थे। उस समय कांग्रेस के चार विधायक थे, जिन पर नीतीश कुमार की नजर थी। नरेन्द्र मोदी के मुद्दे पर नीतीश कुमार की नाराजगी अप्रैल से ही बढ़ने लगी थी। उन्हें मालूम था कि देर-सबेर भाजपा से अलग होना पड़ेगा। वे जानते थे कि अगर भाजपा से गठबंधन टूटा तो उनका बहुमत खत्म हो जाएगा। वे तभी से बहुमत के जुगाड़ के लिए सक्रिय हो गये।
28 अप्रैल 2013 को कांग्रेस विधायक तौसीफ आलम की शादी थी। उस समय तौसीफ आलम बहादुरगंज से कांग्रेस के विधायक थे। इस शादी में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह के साथ किशनगंज पहुंचे थे। कांग्रेस के तीन अन्य विधायक भी समारोह में शामिल हुए। चौथे विधायक खुद दूल्हा ही थे।
शादी में गए, भोज खाया और बहुमत पर बात बन गई
एक तरफ शादी का जश्न चल रहा था तो दूसरी तरफ एक कमरे में कांग्रेस के चारो विधायक नीतीश कुमार के साथ बैठ कर खास गुफ्तगू कर रहे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वहां करीब आधा घंटा तक रहे। फिर उसके बाद वे पूर्णिया चले गए। कहा जाता है कि इस शादी समारोह में कांग्रेस के चारों विधायकों ने नीतीश कुमार को समर्थन देने का फैसला लिया था। इस समारोह में नीतीश कुमार के शामिल होने की चर्चा बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन एक विवाद ने इसे सुर्खियों मे ला दिया।
आरोप लगा कि शादी के जश्न में मुख्यमंत्री के सामने हर्ष फायरिंग की गई। वैसे भी तौसीफ आलम की शादी इसलिए चर्चा में रही थी क्योंकि दुल्हन की विदाई हेलीकॉप्टर से हुई थी। भोज में 50 हजार लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी। इस विवाह समारोह के खर्च पर भी बड़ा विवाद हुआ था।
तब मनमोहन सिंह ने कहा था, नीतीश हैं धर्मनिरपेक्ष
उस समय नीतीश कुमार की कांग्रेस से बहुत ज्यादा नजदीकी बढ़ गई थी। केंद्र की मनमोहन सरकार ने बिहार को पिछड़ा राज्य घोषित कर विकास सहायता राशि बढ़ा दी थी। चर्चा यह होने लगी थी कि नीतीश कुमार अब कांग्रेस के साथ गठबंधन कर भविष्य की राजनीति करेंगे। ऐसा इसलिए कहा जा रहा था कि क्योंकि नीतीश कुमार तब लालू यादव के भी पक्के विरोधी थे। ले-देकर उनके लिए कांग्रेस ही बची थी। 19 जून 2013 को विधानसभा में नीतीश कुमार को फ्लोर टेस्ट पास करना था। इसके दो दिन पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने एक बयान में कहा कि नीतीश कुमार एक धर्मनिरपेक्ष नेता हैं।
सम्राट समेत राजद के 22 विधायकों ने नीतीश के खिलाफ डाला था वोट
19 जून 2013 को सदन में विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। जदयू के 117, कांग्रेस के 4, सीपीआई के 1 और चार निर्दलीय विधायकों ने नीतीश कुमार का समर्थन किया। नीतीश कुमार के पक्ष में 126 वोट पड़े और उन्होंने विश्वास मत जीत लिया। भाजपा के 91 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के विरोध में सदन का बहिष्कार कर दिया। लोजपा के एकमात्र विधायक जाकिर खान ने धर्मनिरपेक्षता के सवाल पर सदन का बहिष्कार किया। उस समय राजद के 22 विधायक थे।
मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तब परबत्ता सीट से राजद के टिकट पर विधायक चुने गए थे। सम्राट चौधरी समेत राजद के सभी 22 विधायकों ने नीतीश कुमार के विरोध में वोट दिया। दो निर्दलीय विधायकों ने भी नीतीश के खिलाफ मतदान किया। विरोध में केवल 24 वोट ही पड़े। वक्त भी क्या मुकद्दर तय करता है। जिस सम्राट चौधरी ने 13 साल पहले नीतीश के खिलाफ सदन में वोट किया, आज उन्होंने उनका ही उत्तराधिकारी बन कर विश्वास मत हासिल किया।