'महाभारत' के 'इंद्रदेव' सतीश कौल की हुई थी दर्दनाक मौत, मरने से पहले हाथ फैलाकर मांगी थी मदद, फिर हुआ ऐसा हाल...
Satish Kaul: पर्दे पर तालियों की गूंज और स्टारडम की चमक हर किसी को नजर आती है लेकिन कई बार इन रोशनियों के पीछे छिपी सच्चाई बेहद दर्दनाक होती है। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता सतीश कौल की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही रही, जहां एक समय वह सुपरस्टार थे, वहीं आखिरी दिनों में उन्हें गुमनामी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा था।सतीश कौल का कश्मीर से फिल्मों तक का सफर
8 सितंबर 1946 को कश्मीर में जन्मे सतीश कौल एक सांस्कृतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता मोहन लाल कौल एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवि थे। बचपन से ही अभिनय की ओर झुकाव रखने वाले सतीश कौल ने अपनी पढ़ाई श्रीनगर में पूरी की थी।
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से सीखी एक्टिंग
इसके बाद सतीश ने अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का रुख किया था। यहां सतीश ने डैनी डेन्जोंगपा, जया बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकारों के साथ ट्रेनिंग ली थी, जो आगे चलकर बड़े स्टार्स बने।पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार बने थे सतीश कौल
-1970 के दशक में सतीश कौल ने पंजाबी फिल्मों के जरिए अपने करियर की शुरुआत की थी और देखते ही देखते वह इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए थे। उनकी रोमांटिक और इमोशनल एक्टिंग ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी।
-'सस्सी पुन्नू', 'सुहाग चूड़ा', 'पटोला' और 'मौला जट्ट' जैसी पंजाबी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया था। करीब चार दशकों के लंबे करियर में उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया था और एक समय ऐसा आया जब उन्हें प्यार से 'पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन' कहा जाने लगा था।
हिंदी फिल्मों में भी आजमाई किस्मत
पंजाबी फिल्मों में अपार सफलता के बाद सतीश कौल ने हिंदी सिनेमा में भी कदम रखा था। उन्होंने 'कर्मा', 'राम लखन' और 'कमांडो' जैसी फिल्मों में काम किया था लेकिन यहां उन्हें वैसी लोकप्रियता नहीं मिल पाई, जैसी उन्हें पंजाबी इंडस्ट्री में हासिल हुई थी।
'महाभारत' के 'इंद्रदेव' ने दिलाई घर-घर पहचान
-सतीश कौल के करियर का सबसे यादगार मोड़ रहा 'महाभारत', जिसमें उन्होंने 'इंद्रदेव' का किरदार निभाया था। इस भूमिका ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई और वह घर-घर में पहचाने जाने लगे थे।
-इसके अलावा सतीश कौल ने 'विक्रम और बेताल' और 'सर्कस' जैसे लोकप्रिय टीवी शो में भी काम किया था। दिलचस्प बात ये है कि शाहरुख खान ने भी एक बार बताया था कि सतीश कौल को देखकर ही उन्हें अभिनय की प्रेरणा मिली थी।
निजी जिंदगी में टूटते रिश्ते और बढ़ती मुश्किलें
-जहां करियर में सतीश कौल को अपार सफलता मिल रही थी, वहीं निजी जिंदगी में उन्हें कई झटके लगे थे। आपको बता दें कि शादी के कुछ समय बाद ही उनका तलाक हो गया था और उनकी पत्नी बेटे के साथ अलग हो गई थीं।
-साल 2011 में सतीश कौल को उनके योगदान के लिए पीटीसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था लेकिन उसी साल उन्होंने मुंबई छोड़कर पंजाब के लुधियाना में बसने का फैसला कर लिया था। लुधियाना में उन्होंने एक एक्टिंग स्कूल शुरू किया था, जो आर्थिक रूप से सफल नहीं हो पाया था।
बीमारी, पैसों की कमी और अकेलेपन ने एक्टर को तोड़ दिया था
समय के साथ सतीश कौल की परेशानियां बढ़ती चली गई थीं। साल 2015 में वह एक बड़े हादसे का शिकार हो गए थे जिसमें उनका कूल्हा टूट गया था। ऐसे में उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा था। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा था।
बीमारी में हाथ फैलाकर सबसे मांगी थी मदद
-इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सतीश कौल को संघर्ष करना पड़ रहा था और वह एक छोटे से किराए के घर में रहने को मजबूर हो गए थे। अपने मुश्किल दौर में सतीश कौल ने फिल्म इंडस्ट्री से मदद की अपील भी की थी। उन्होंने इंटरव्यू और वीडियोज के जरिए अपनी स्थिति लोगों के साथ शेयर की थी लेकिन अपेक्षित मदद उन्हें नहीं मिल सकी।
-सतीश कौल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था- मुझे एक अभिनेता के रूप में लोगों से खूब प्यार मिला लेकिन अब एक जरूरतमंद इंसान के रूप में थोड़ी मदद और तवज्जो की उम्मीद है, जो नहीं मिल रही है।
बिना पछतावे के कहा अलविदा
-इतनी कठिनाइयों के बावजूद सतीश कौल ने अपने जीवन को लेकर कभी शिकायत नहीं की थी। उन्होंने कहा था कि जब वह अपने करियर के शिखर पर थे, तब उन्हें दर्शकों का अपार प्यार मिला था और इसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।
-मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2021 को 74 साल की उम्र में सतीश कौल का निधन हो गया था। उनकी कहानी एक ऐसी सच्चाई बयां करती है, जो फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे छिपे संघर्ष को उजागर करती है।