होर्मुज में अब टोल वसूलेगा 'विजेता' ईरान, भारत के दोस्त ने मारी असली बाजी, फिर भी ठुकराया अरबों का ऑफर...
तेहरान: पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 2 सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान हो गया है। अमेरिका और ईरान दोनों ने अपनी जीत का दावा किया है। हालांकि हकीकत यह है कि सीजफायर डील ईरान के 10 सूत्रीय प्रपोजल के आधार पर हुई है। इस डील के बाद अब ईरान अपने नुकसान की भरपाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट में टोल लगाने की तैयारी कर रहा है।
ईरान यहां से गुजरने वाले दुनिया के हर जहाज से 2 मिलियन डॉलर का टोल वसूलना चाहता है। ईरान ने कहा है कि वह इसमें अपने पड़ोसी ओमान को भी ट्रांजिट फीस में हिस्सा देगा जिससे मस्कट सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा है। इस बीच ओमान ने ईरान से उलट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में कोई भी टोल नहीं लगाया जा सकता है। इससे इस मुद्दे दोनों देशों में मतभेद देखे जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इससे जमकर कमाई होगी और वह भी इसमें हिस्सा लेगा।
ईरान के इस प्लान से दोनों ही देश अरबों डॉलर कमा सकते हैं। वहीं सऊदी अरब, यूएई, कतर जैसे खाड़ी के अन्य प्रभावशाली देशों को झटका लगा है। दरअसल, ईरान और ओमान के बीच मात्र 34 किमी का यह संकरा समुद्री इलाका दुनिया के तेल व्यापार की लाइफ लाइन है। इसके बंद होने से ही भारत समेत दुनियाभर में हाहाकार मच गया।
यहां से ही दुनिया का तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज से वसूले गए पैसे से ही देश में पुर्ननिर्माण कार्य होगा। ईरान ने कहा है कि इस लड़ाई की वजह से उसके रक्षा, प्रशासन और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी कहा है कि ईरान का यह प्रस्ताव विचार करने योग्य है। होर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से बंद है।
ईरान का क्या है होर्मज टोल प्लान
ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ स्थायी शांति डील चाहता है और इसके लिए उसने होर्मुज स्ट्रेट को हथियार बना लिया। ईरान ने कहा कि यह 2 मिलियन डॉलर की फीस अलग-अलग जहाजों पर अलग-अलग रहेगी। यह उसके कार्गो पर निर्भर करेगा। ईरान ओमान के साथ मिलकर एक प्रोटोकॉल बना रहा है जिसके जरिए जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना होगा।
ओमान ने कहा है कि वह इस बारे में ईरान के साथ विकल्पों पर बातचीत कर रहा है लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। वहीं अंतरराष्ट्रीय कानून UNCLOS की बात करें तो एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर पड़ोसी देश फीस की मांग नहीं कर सकते हैं।
ओमान की 20 फीसदी आबादी भारतीय
होर्मुज संकट से भारत भी बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। ओमान और भारत के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथा आर्थिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच साल 1955 में राजनयिक संबंध बने थे। ओमान खाड़ी देशों में भारत का भरोसेमंद पार्टनर देश है। ओमान खाड़ी के इलाके में भारत के लिए प्रवेश द्वार की तरह से है।
दोनों देशों के बीच साल 2024-25 में 10.61 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। ओमान में 500,000 भारतीय रहते हैं। ओमान की करीब 20 फीसदी आबादी भारतीय है। इनमें से 60 फीसदी केरल के लोग हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और ऊर्जा को लेकर घनिष्ठ संबंध है। ओमान से हर साल 78 करोड़ डॉलर का रेमिटेंस आता है।
ईरान अब पुनर्निर्माण का काम शुरू कर सकता है:ट्रंप
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीचदो हफ्ते के सीजफायर के ऐलानके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे दुनिया में शांति के लिए बड़ा दिन बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब इस स्थिति से थक चुका है और वह भी शांति चाहता है, ऐसे में अब तेहरान पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के ट्रैफिक को संभालने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सही तरीके से चलता रहे।
'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में ट्रंप ने लिखा,'यह दुनिया की शांति के लिए बड़ा दिन है। क्योंकि वे अब काफी कुछ झेल चुके हैं। अमेरिका इस दौरान हर तरह की मदद करेगा। हम हर तरह की जरूरी सप्लाई पहुंचाएंगे और वहां मौजूद रहेंगे ताकि हालात सामान्य बने रहें। मुझे पूरा भरोसा है कि सब ठीक होगा। जैसे अमेरिका में हम 'गोल्डन एज' देख रहे हैं, वैसे ही यह मध्य पूर्व के लिए भी एक नया दौर साबित हो सकता है।'
इससे पहले,ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले से पीछे हटते हुए दो हफ्ते का अस्थायी विराम घोषित किया था। यह फैसला उस शर्त पर लिया गया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, सुरक्षित और तुरंत खोलेगा। इस घोषणा से पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है।