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मेरठ में बेटी के तलाक पर पिता ने ढोल पर किया डांस, "लीगल क्लीनिक" ने कचहरी में मिठाइयां बांटी, कहा-बेटी का उत्पीड़न नहीं होने देंगे...

मेरठ में बेटी के तलाक पर पिता ने ढोल पर किया डांस, "लीगल क्लीनिक" ने कचहरी में मिठाइयां बांटी, कहा-बेटी का उत्पीड़न नहीं होने देंगे...

मेरठ। चार साल पहले इकलौते बेटे की मौत पर लीगल क्लीनिक की शुरूआत करने वाले रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने एक और मिशाल पेश की है। ससुराल में उत्पीड़न का शिकार बेटी का तलाक कराया। तलाक होने पर कचहरी में फूल माला डालकर बेटी का स्वागत कर मिठाई बांटी।

परिवार के सभी लोगों ने बेटी का फोटो लगी काली टीशर्ट पहनकर ढोल की थाप पर डांस किया। उसके बाद घर पर भी फूल मालाओं के साथ बेटी का स्वागत किया गया। ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि बेटी को बेटे की तरह ही मानते है।

शास्त्रीनगर एल ब्लाक निवासी रिटायर्ड जज डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के कोना याकूबपुर निवासी गौरव अग्निहोत्री से की थीं। गौरव अग्निहोत्री सेना में मेजर हैं, उनकी तैनाती जालंधर में हैं।

गौरव के पिता श्याम किशोर अग्निहोत्री सेना में मेजर सूबेदार पद से रिटायर्ड हैं। आरोप है कि शादी के बाद से ससुराल पक्ष के लोग प्रणिता शर्मा का उत्पीड़न कर रहे थे। सात सालों से प्रणिता ससुराल में उत्पीड़न झेल रही थी।

इसी बीच प्रणिता ने एक बेटे को भी जन्म दिया। उसके बाद भी ससुराल पक्ष के लोगों को उत्पीड़न जारी रहा। तब प्रणिता ने गौरव से तलाक लेने का निर्णय लिया और फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई। शनिवार को कोर्ट ने प्रणिता और गौरव का तलाक मंजूर कर लिया।

परिवार ने लोग तलाक के बाद गले में माला डालकर ढोल की थाप पर कोर्ट से प्रणिता को घर लेकर आए। घर की चौखट पर भी बेटी का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने पिता की वह इकलौती बेटी हैं।

प्रणिता के भाई की साल 2022 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद भी परिवार ने ससुराल में उत्पीड़न का शिकार हुई प्रणिता को संभाला। प्रणिता का कहना है कि मेरा यह निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो शादी के बाद ससुराल में उत्पीड़न झेलती है। उन्हें चाहिए कि खुद को मजबूत कर यह निर्णय लें।

ससुराल में बेटी का उत्पीड़न नहीं होने देंगे

डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि बेटी शादी के बाद उत्पीड़न झेल रही हैं, तब पिता का दायित्व बनता है कि उसने अपने घर सम्मान से लेकर आए। हम सिर्फ बेटी को लेकर आए, शादी में दिया गया सामान ससुराल में ही छोड़ दिया। साथ ही समाज को संदेश दे रहे है कि बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का सदस्य मानते है। उन्होंने कहा कि बेटी को उत्पीड़न के बाद ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है।

बेटे की मौत पर खोल चुके है लीगल क्लीनिक

डा. ज्ञानेंद्र शर्मा उत्तराखंड के कई जिलों में जज रहे चुके हैं। उनके इकलौते बेटे प्रणव वशिष्ठ ने नेशनल ला यूनिवर्सिटी से ला किया था। एक केस के सिलसिले में चंडीगढ़ हाईकोर्ट गए तो वहां सीढ़ियों से फिसलकर चोट के कारण कोमा में पहुंच गए।

पांच महीने अस्पताल में रहने के बाद मौत हो गई। बेटे के सपने को पूरा करने के लिए सितंबर 2022 में लीगल क्लीनिक खोला गया। ताकि समाज को निशुल्क विधिक सलाह मिले। टूटते परिवारों को बचाने के लिए युवाओं की प्री मैरिज काउंसिलिंग और सेना के रिटायर जवानों को सलाह दें।