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चर्च में फेरे, क्रिस्चन पादरी ने पिता बन अनाथ हिंदू लड़की का किया कन्यादान, केरल में हुई दिल छू लेनेवाली शादी...

चर्च में फेरे, क्रिस्चन पादरी ने पिता बन अनाथ हिंदू लड़की का किया कन्यादान, केरल में हुई दिल छू लेनेवाली शादी...

कोट्टायम, न्यूज। केरल के कोट्टायम में एक अनोखी शादी हुई। इस शादी की रस्म ने ऑनलाइन खूब सुर्खियां बटोरी हैं। एक दिल को छू लेने वाले वीडियो सामने आया है। इसमें एक ईसाई पादरी को एक दुल्हन के लिए एक जरूरी हिंदू रस्म निभाते हुए दिखाया गया है। फादर ने पिता बनकर दुलहन का कन्यादान किया। 

बताया जा रहा है कि लड़की बचनप में ही अनाथ हो गई थी। हिंदू परिवार की इस बच्ची को पादरी ने ही पाल-पोसकर बड़ा किया। उसके बाद हिंदू लड़के से उसकी शादी की। इस अनोखे पल ने इंसानियत, रिश्तों और धार्मिक सीमाओं से परे परिवार के असली मतलब पर चर्चा छेड़ दी है।

अलग धर्मों के बीच के गहरे रिश्ते की मिसाल

इस वायरल वीडियो में, फादर रॉय मैथ्यू एक हिंदू दुलहन, पार्वती के लिए पारंपरिक 'कन्यादान' की रस्म निभाते हुए दिख रहे हैं। यह रस्म, जिसमें आम तौर पर दुल्हन के माता-पिता उसे विदा करते हैं, इस मामले में और भी ज़्यादा भावुक और गहरा अर्थ लिए हुए थी। सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो की खूब तारीफ़ हो रही है। इसे अलग-अलग धर्मों के बीच करुणा और एकता की भावना को दिखाने के लिए सराहा जा रहा है।

अनाथालय से शादी के मंडप तक

खबरों के मुताबिक, पार्वती ने अपने बचपन के शुरुआती साल 'बेथलहम आश्रम' में बिताए थे, क्योंकि बचपन में ही उसकी मां का देहांत हो गया था। उसके पालन-पोषण के दौरान, फादर रॉय मैथ्यू उसकी ज़िंदगी से बहुत करीब से जुड़े रहे और धीरे-धीरे उसके लिए एक पिता जैसी हस्ती बन गए। उसके बचपन में उनकी मौजूदगी और सालों तक दिए गए उनके मार्गदर्शन ने शादी की रस्म में उनकी भूमिका को और भी ज़्यादा खास और यादगार बना दिया।

अलग-अलग परंपराओं का खूबसूरत मेल

खबरों के अनुसार, यह शादी सेंट पॉल चर्च के पैरिश हॉल में हुई थी। हालांकि शादी की जगह ईसाई समुदाय से जुड़ी हुई थी, लेकिन शादी की रस्में दुल्हन की परंपराओं के अनुसार हिंदू रीति-रिवाजों से पूरी की गईं। पार्वती की शादी अनंतू से हुई। बताया जा रहा है कि इस शादी को तय करवाने में फादर रॉय ने ही अहम भूमिका निभाई।

पादरी ने पिता बन किया कन्यादान

शादी की रस्मों का सबसे दिल को छू लेने वाला पल वह था, जब फादर रॉय ने 'कन्यादान' की रस्म निभाई। यह रस्म एक अभिभावक और पिता के तौर पर उनकी भूमिका का प्रतीक थी। यह भाव उनके सालों की देखभाल, साथ और गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता था। बाद में उन्होंने इस अनुभव को अपनी सेवा-यात्रा के सबसे यादगार और अर्थपूर्ण पलों में से एक बताया।

धर्म से ऊपर इंसानियत की तारीफ

इस वीडियो को ऑनलाइन लोगों का ज़बरदस्त प्यार और समर्थन मिला है। यूज़र्स इस नेक काम की तारीफ़ करते हुए इसे 'साझी इंसानियत' की एक खूबसूरत मिसाल बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि कुछ इंसानों की रूह सचमुच बहुत खूबसूरत होती है। एक अन्य ने लिखा कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। कई दर्शकों ने इस पल को बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाला बताया।