ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की आज107वीं जयंती गोरखपुर महापौर एवं नगर आयुक्त ने मार्ल्यापण कर निवेदित की श्रद्धा...
गोरखपुर, ब्यूरो। गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ की गुरुवार को 107 वीं जयंती श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई। गोरखपुर नगर निगम के नवीन भवन के समक्ष स्थापित उनकी आदमकद प्रतिमा पर महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव एवं नगर आयुक्त अजय जैन ने मार्ल्यापण कर आशीर्वाद लिया।इस दौरान नगर निगम के अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों एवं पार्षदों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
महंत अवेद्यनाथ का जीवन
महंत अवेद्यनाथ का जन्म 28 मई 1921 (राष्ट्र संत मंहत अवेद्यनाथ स्मृति ग्रंथ नाम से लिखी पुस्तक में उनका जन्मदिन 18 मई 1919 भी बताया गया है।) को गढ़वाल (उत्तरांचल) जिले के कांडी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम राय सिंह विष्ट था। अपने पिता के वे इकलौते पुत्र थे। उनके बचपन का नाम कृपाल सिंह विष्ट था। नाथ परंपरा में दीक्षित होने के बाद वे अवेद्यनाथ हो गए। कृपाल सिंह माता पिता का बचपन में निधन हो गया, कुछ बड़े हुए तो पाल्य दादी भी नहीं रहीं। ऋषिकेश में सन्यासियों के सत्संग से हिंदू धर्म, दर्शन, संस्कृत और संस्कृति के प्रति रुचि जगी तो शांति की तलाश में केदारनाथ, ब्रदीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और कैलाश मानसरोवर की यात्रा की। वापसी में हैजा होने पर साथी उनको मृत समझ आगे बढ़ गए।
राजनीतिक करियर
इसके बाद नाथ पंथ के जानकार योगी निवृत्तिनाथ, अक्षयकुमार बनर्जी और गोरक्षपीठ के सिद्ध महंत रहे गंभीरनाथ के शिष्य योगी शांतिनाथ से 1940 में मुलाकात हुई। निवृत्तनाथ के साथ गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ के निकट आए है। बाद में नाथपंक्ष में दीक्षित हो गए। मीनाक्षीपुरम के धर्मांतरण की घटना से आहत होकर राजनीति में आए ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने 1969, 1989, 1091 और 1996 से गोरखपुर सदर संसदीय सीट से प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 1962, 1967,19 69,19 74 और 1977 में मानीराम विधानसभा का भी प्रतिनिधित्व किया। 1984 में शुरु रामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के शीर्षस्थ नेताओं में शुमार श्री रामजन्म भूमि यज्ञ समिति के अध्यक्ष व रामजन्म भूमि न्यास समिति के आजीवन सदस्य रहे।
योग और दर्शन में योगदान
योग व दर्शन के मर्मज्ञ महंतजी के राजनीति में आने का मकसद हिंदू समाज की कुरीतियों को दूर करना और राम मंदिर आंदोलन को गति देना रहा है। बहुसंख्यक समाज को एका का संदेश देने के लिए काशी के डोमराजा के घर भोजन किया बहुसंख्यक समाज को जोड़ने के लिए सहभोजों के क्रम में उन्होंने बनारस में संतों के साथ डोमराजा के घर सहभोज किया। महंत अवेद्यनाथ ने वाराणसी व हरिद्वार में संस्कृत का अध्ययन किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़ी शैक्षणिक संस्थाओं के अध्यक्ष व मासिक पत्रिका योगवाणी के संपादक भी रहे। 12 सितंबर 2014 गोरक्षपीठ के महंत अवेद्यनाथ का ब्रह्म्लीन हो गए।