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वाराणसी में प्राचीन राम भट्ट तालाब में गंदगी का अंबार, विसर्जित की गई सरस्वती प्रतिमाओं के 3 माह पूर्व के अवशेष अब भी बरकरार...

वाराणसी में प्राचीन राम भट्ट तालाब में गंदगी का अंबार, विसर्जित की गई सरस्वती प्रतिमाओं के 3 माह पूर्व के अवशेष अब भी बरकरार...

वाराणसी, ब्यूरो। पंचक्रोशी परिक्रमा के चतुर्थ पड़ाव शिवपुर स्थित प्राचीन राम भट्ट तालाब में पिछले कई महीनों से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लगभग दो माह पूर्व सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रवाहित की गई प्रतिमाओं के अवशेष अभी भी तालाब के पानी में तैरते नजर आ रहे हैं, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु और आसपास के लोग काफी परेशान हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, लगभग 210 वर्ष पूर्व राजा मोतीचंद ने पंचक्रोशी यात्रियों की सुविधा के लिए इस पौराणिक तालाब का निर्माण करवाया था, तभी से यह तालाब राम भट्ट तालाब के नाम से जाना जाता है। 

तालाब के चारों कोनों पर देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं। इनमें तालाब के पूर्वी तट पर प्राचीन अष्टभुजी मंदिर और शिव मंदिर स्थित हैं, जबकि पश्चिमी छोर पर प्राचीन फलाहारी बाबा आश्रम और गणेश जी का मंदिर है, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन तालाब में व्याप्त गंदगी और पानी से उठ रही दुर्गंध लोगों को परेशान कर देती है।

शिवपुर निवासी दिलीप कुमार केसरी और संतोष कुमार केसरी ने कहा, "मेरे बाल्यावस्था में तालाब का जल बहुत ही स्वच्छ और शुद्ध था। हम सभी लोग इस तालाब में प्रतिदिन नहाया करते थे और पंचकोशी यात्रा के दौरान पांच क्रोशिया यात्री भी तालाब में स्नान करते थे। लेकिन वर्तमान समय में तालाब का जल पूरी तरह दूषित हो चुका है और कोई भी पंचकोशियात्री तालाब में स्नान नहीं करना चाहता।"

तालाब के उत्तरी छोर पर बने घाट पर लोग दसवां इत्यादि कर्म करने के लिए आते हैं, लेकिन तालाब में व्याप्त गंदगी और दुर्गंध के कारण लोगों का जीना दुभर हो जाता है। कमलेश कुमार केशरी ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्राचीन तालाब की नियमित साफ-सफाई कराई जाए।

पृथ्वी नाथ शर्मा ने कहा, "हमारे पिताजी बताया करते थे कि यह तालाब बहुत दूर तक फैला हुआ था और सदैव स्वच्छ जल से भरा रहता था। समय पर तालाब का संरक्षण नहीं हुआ, इस कारण घाट की सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हैं और तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।"

पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतर्गत पड़ने वाले इस ऐतिहासिक प्राचीन राम भट्ट तालाब का बहुत महत्व है। बहुत पहले आश्रम में रहने वाले पुजारी और पांच क्रोशिया यात्री इस तालाब के स्वच्छ जल से स्नान और आचमन आदि किया करते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक अनदेखी के कारण तालाब अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है। महंत रामदास त्यागी, प्राचीन फलाहारी बाबा आश्रम के प्रमुख, ने कहा कि तालाब की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और इसे बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि तालाब की सफाई और संरक्षण नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देगा। तालाब के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोग इस समस्या को लेकर काफी चिंतित हैं और प्रशासन से उचित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।

इस प्राचीन तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए स्थानीय प्रशासन को सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो यह पौराणिक स्थल केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।

इस प्रकार, राम भट्ट तालाब की स्थिति न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। स्थानीय निवासियों की आवाज को सुनकर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल को पुनर्जीवित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित किया जा सके।

इस तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि इस पौराणिक स्थल की गरिमा को बनाए रखा जा सके और श्रद्धालुओं को एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सके।