दूल्हा है कि धन्ना सेठ: दुल्हन लेकर पूरे गांव को दे गया 33 करोड़ का तोहफा, अनोखी शादी की हर तरफ है चर्चा...
Groom family gifts insurance cover to village: मराठवाड़ा क्षेत्र में हुई यह शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है. वहीं हर कोई दिलदार दूल्हे के किस्से सुना रहा है. संभाजीनगर के एक गांव में शादी की रस्में चल रही थीं.रीति-रिवाजों, फूलों के हार, बैंड बाजा और दावत के बाद दूल्हे ने दुल्हन के साथ सात फेरे लिए. दुल्हन के परिवार ने दूल्हे को अपनी बेटी सौंपी लेकिन असली तोहफा तो दूल्हे के परिवार की ओर से दिया गया, जो इतिहास बन गया।
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कंधार तालुका में बहादरपुरा गांव में 20 मई को हुई शादी तब चर्चा में आ गई जब दूल्हा और उसके परिवार ने पूरे गांव को 33 करोड़ रुपये का तोहफा दे डाला. यह तोहफा भी बेहद खास था क्योंकि दूल्हे ने पूरे गांव में मौजूद हर व्यक्ति का 1-1 लाख का एक्सीडेंट इंश्योरेंस करवा दिया।
दूल्हा सिद्धेश्वर पेठकर और उनके परिवार ने गांव के सभी 3,465 निवासियों को 1-1 लाख रुपये का एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर देकर ऐसी मिसाल कायम की, जो अभी तक कहीं नहीं देखी गई. दूल्हे ने इस बीमा के तोहफे पर कुल 33.6 करोड़ रुपये खर्च किए।
इस बारे में दूल्हा सिद्धेश्वर पेठकर ने बताया कि गांव में सांप काटने, बिजली गिरने और खेती संबंधी दुर्घटनाएं आम हैं. इन दुर्घटनाओं के चलते कई परिवार बिना किसी सहारे के बिखर जाते हैं. इसी को ध्यान में रखकर परिवार ने ग्राम पंचायत के नाम पर ग्रुप एक्सीडेंट पॉलिसी खरीदी. गांव की वोटर लिस्ट के आधार पर बिना किसी भेदभाव या कागजी झंझट के हर व्यक्ति को कवर दिया गया. यह पॉलिसी एक साल के लिए वैध है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सिद्धेश्वर ने कहा, "हमारी संस्कृति में दान की घोषणा नहीं की जाती. हमें तालियां नहीं चाहिए, आशीर्वाद काफी हैं." उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि 'हमारी खुशी घर से बाहर भी जाए'।
वहीं दूल्हे के बड़े भाई अनूप पेठकर ने भावुक होते हुए कहा, "नांदेड़ के आसपास के गांवों में दुर्घटनाओं में मौतें बहुत होती हैं. हम चाहते थे कि हमारी शादी सिर्फ यादें नहीं, बल्कि सुरक्षा भी छोड़ जाए।"
बता दें कि करीब 4,500 मेहमानों वाली इस शादी में सामूहिक उत्सव के साथ-साथ सामूहिक सुरक्षा का संदेश भी गया. गांववासी मोहन शेकापुरे ने कहा, "पूरे गांव को शगुन की तरह सुरक्षा की चादर मिली है. ऐसा विवाह तोहफा हमने पहले कभी नहीं देखा।"
वहीं सरपंच बलिराम पेठकर ने इसे क्षेत्र का संभवतः पहला मामला बताया. उन्होंने कहा, "शादियों में लोग मिठाई और स्मृति चिन्ह देते हैं. यहां एक परिवार ने सुरक्षा दी है।"
गांव में खुशी और उम्मीद का माहौल
20 मई को शादी समाप्त होने के बाद भी बहादरपुरा के लोग सिर्फ यादों के साथ नहीं, बल्कि आने वाले अनिश्चित कल के खिलाफ एक ठोस वादे के साथ मुस्कुरा रहे हैं और इस शादी की ही चर्चा कर रहे हैं. यह घटना ग्रामीण भारत में सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन गई है। यह अनोखा विवाह दर्शाता है कि खुशी बांटने के कई तरीके हो सकते हैं।