ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: AI, ड्रोन और स्वदेशी डिफेंस सिस्टम पर भारत का फोकस...
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ 7 मई को मनाई जा रही है। यह वही सैन्य अभियान था जिसने भारत की रक्षा नीति और सुरक्षा रणनीति को बड़े स्तर पर बदल दिया। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद शुरू हुए इस अभियान ने भारत को केवल सैन्य जवाब तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देश ने रक्षा क्षेत्र में तकनीक, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लंबी दूरी की मारक क्षमता पर बड़ा फोकस शुरू कर दिया।
सरकार अब रक्षा तैयारियों को केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं मान रही है। इसके बजाय घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने, विदेशी निर्भरता कम करने और लंबे समय तक सैन्य क्षमता बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा नीति में यह एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।
पिछले एक साल में सरकार ने सेना की तैयारियों को मजबूत करने के लिए कई बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। मार्च 2026 में ही करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की खरीद को हरी झंडी दी गई।
बड़े सैन्य सौदों पर जोर
भारत ने फरवरी 2026 में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की मंजूरी दी। इन विमानों में मेटेओर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल जैसी आधुनिक हथियार प्रणाली होगी। अप्रैल में भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भी शामिल किया, जिससे देश की परमाणु क्षमता और मजबूत हुई।
इसके अलावा अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया गया, जिसकी मारक क्षमता करीब 5000 किलोमीटर तक बताई गई है। रूस से पांच नए एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम लेने का फैसला भी किया गया, ताकि देश की हवाई सुरक्षा और मजबूत हो सके।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने आधुनिक तकनीक आधारित युद्ध पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है। सेना की तीनों शाखाएं अब लक्ष्य पहचान और हमले की योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन से मिले अनुभव अब सीधे रक्षा रणनीति में लागू किए जा रहे हैं।
ड्रोन और डिजिटल युद्ध पर फोकस
भारत अब लंबी और छोटी दूरी के ड्रोन, बिना पायलट वाले सिस्टम और तेज तैनाती वाले विमानों की खरीद पर तेजी से काम कर रहा है। नौसेना की निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका से छह बोइंग पी8-आई विमान भी खरीदे जा रहे हैं।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक अब रक्षा खर्च को केवल सुरक्षा जरूरत नहीं, बल्कि औद्योगिक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार रक्षा आधुनिकीकरण को 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान से जोड़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत अब केवल विदेशी हथियार खरीदने की नीति पर निर्भर नहीं रहना चाहता। सरकार का लक्ष्य है कि देश खुद डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और अपग्रेड की क्षमता विकसित करे। इसलिए रक्षा नीति का फोकस अब सिर्फ खरीद से हटकर क्षमता निर्माण पर आ गया है।
रक्षा बजट और आत्मनिर्भरता पर जोर
भारत सरकार का लक्ष्य 2031 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के करीब 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने का है। 2027 के केंद्रीय बजट में रक्षा पूंजीगत खर्च करीब 22 लाख करोड़ रुपये रखा गया, जो पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत ज्यादा है।
सरकार चाहती है कि रक्षा खर्च से केवल हथियार न खरीदे जाएं, बल्कि एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और रक्षा उत्पादन उद्योग को भी बढ़ावा मिले। इसी वजह से 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत 'बाय इंडियन' और 'बाय एंड मेक इंडियन' जैसी श्रेणियां बनाई गईं, जिससे घरेलू कंपनियों को बढ़ावा मिले। सरकार ने सैकड़ों रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगाई है, ताकि उनका निर्माण भारत में हो सके।
निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ी भूमिका
अब करीब 75 प्रतिशत रक्षा खरीद घरेलू बाजार से करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भूमिका भी बढ़ाई गई है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
आईडेक्स कार्यक्रम के जरिए ड्रोन, एआई और नई सैन्य तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश नियमों को भी आसान बनाया है, ताकि नई तकनीक और निवेश भारत आ सके।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत अभी भी इंजन, सेंसर, सेमीकंडक्टर और कई अहम रक्षा तकनीकों के लिए विदेशी देशों पर निर्भर है। इसलिए पूरी आत्मनिर्भरता हासिल करने में अभी समय लगेगा।
नई रक्षा सोच की शुरुआत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा नीति में सबसे बड़ा बदलाव सोच के स्तर पर माना जा रहा है। अब रक्षा को केवल सैन्य जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की रणनीति तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित मानी जा रही है ज्यादा रक्षा निवेश, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और विदेशी देशों के साथ तकनीकी साझेदारी मजबूत करना।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत इस दिशा में सफल रहा तो देश केवल सैन्य ताकत ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति बना सकेगा। ऑपरेशन सिंदूर को अब केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की नई रक्षा रणनीति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।