'कॉकरोच कैंपेन' के पीछे फर्जी वकीलों का गैंग !! BCI चेयरमैन का बड़ा दावा, की CBI जांच की मांग...
नईदिल्ली ब्यूरो। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने दावा किया है कि देशभर की अदालतों में वकील के भेष में घूम रहे 35 से 40 फीसदी लोग फर्जी डिग्री धारक हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे लोग न सिर्फ न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि अदालतों के कामकाज और असली वकीलों के भविष्य पर भी असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में में याचिका दाखिल कर देशभर के वकीलों की डिग्रियों की जांच और पूरे मामले की CBI जांच की मांग करेगी।
'कॉकरोच कैंपेन' के पीछे फर्जी वकीलों का गैंग: BCI चीफ
मनन मिश्रा ने दावा किया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चला "कॉकरोच" कैंपेन दरअसल उन्हीं फर्जी वकीलों का नेटवर्क चला रहा है, जो जांच नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि ये लोग छोटी-छोटी बातों पर हड़ताल करते हैं, अदालतों को बदनाम करते हैं और न्यायपालिका के खिलाफ माहौल बनाते हैं। BCI चेयरमैन के मुताबिक, "इन लोगों के पास बहुत पैसा है, बड़ा संगठन है और यही लोग सोशल मीडिया पर इस तरह के कैंपेन चला रहे हैं ताकि CBI जांच न हो सके।"
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी से जुड़ा विवाद
दरअसल हाल में सोशल मीडिया पर एक विवाद तब खड़ा हुआ जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत में की गई एक टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उसी विवाद के दौरान मनन मिश्रा से "कॉकरोच जनता पार्टी" वाले कैंपेन को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फर्जी डिग्री लेकर अदालत परिसरों में घूमने वाले लोगों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। लेकिन उसी बात को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रचारित किया गया।
2015 में शुरू हुई थी डिग्री वेरिफिकेशन की कोशिश
सीनियर एडवोकेट मनन मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल को पहली बार 2015 में बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्री वाले लोगों के अदालतों में सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। उनके मुताबिक, "देश में 30-35 फीसदी लोग ऐसे पाए गए जो कोर्ट बंद करवाने, हड़ताल कराने और खुद को वकील बताने का काम कर रहे थे, जबकि उनके पास असली कानून की डिग्री नहीं थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोग प्रॉपर्टी डीलिंग और लैंड ग्रैबिंग जैसे कामों में भी वकील की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं।
25 लाख वकीलों में सिर्फ 12 लाख ने दिए दस्तावेज
BCI चेयरमैन ने बताया कि डिग्री वेरिफिकेशन के लिए नियम बनाए गए थे और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। उस समय तत्कालीन CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने भी माना था कि फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले लोग मौजूद हैं।
मनन मिश्रा के मुताबिक, इसके बाद पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता में समिति बनाई गई, जिसका मकसद देशभर के वकीलों की डिग्रियों की जांच करना था। उन्होंने बताया कि देशभर में करीब 25 लाख वकील नामांकित हैं, लेकिन वेरिफिकेशन प्रक्रिया में केवल 12 से 12.5 लाख लोगों ने ही आवेदन दिया। बाकी लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया।
"दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में ज्यादा सक्रिय"
BCI प्रमुख ने दावा किया कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में फर्जी वकीलों के नेटवर्क ज्यादा सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जब बार काउंसिल ने वेरिफिकेशन शुरू किया था, तब उसके खिलाफ प्रदर्शन हुए, पुतले जलाए गए और विरोध अभियान चलाए गए।
"BCI के पास सीधे कार्रवाई की ताकत नहीं"
मनन मिश्रा ने कहा कि एडवोकेट्स एक्ट के तहत बार काउंसिल केवल उन्हीं लोगों पर कार्रवाई कर सकती है जो आधिकारिक तौर पर नामांकित वकील हैं। उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति बिना डिग्री के सिर्फ काला कोट पहनकर घूम रहा है, तो उसे पकड़ने या उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई करने की कोई मशीनरी हमारे पास नहीं है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा आदेश दे, जिसमें अदालतों में पेश होने वाले हर वकील के पहचान पत्र, सर्टिफिकेट और रोल नंबर की अनिवार्य जांच हो।
CBI जांच की मांग करेगी बार काउंसिल
बार काउंसिल के चेयरमैन ने कहा कि अब बार काउंसिल सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक याचिका दाखिल कर CBI जांच की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि इससे "दूध का दूध और पानी का पानी" हो जाएगा और फर्जी डिग्री वालों के खिलाफ कार्रवाई संभव होगी। मनन मिश्रा ने कहा कि असली और मेहनत से पढ़ाई करने वाले युवा वकील सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, "फर्जी डिग्री वाले लोग न्यायपालिका और वकालत दोनों की साख गिरा रहे हैं। गंभीर जांच जरूरी है और यह काम CBI ही कर सकती है।"