कोलकाता न्यूज::वंदे मातरम के विरोध पर भड़कीं बंगाल की मंत्री, जमीयत के आरोपों पर बोलीं- बंगाल में रहना है तो...
कोलकाता/पश्चिमबंगाल न्यूज। जमीयत उलेमा ए हिंद ने पश्चिम बंगाल में स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने समेत सरकार के कई फैसलों का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इसे लेकर कानूनी और लोकतांत्रिक जंग जारी रहेगी।इसपर बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी को भारत मां की संतान होने में परेशानी है, तो वह किसी और देश में रह सकता है। साथ ही का है कि भारतीय न्याय संहिता सभी पर समान रूप से लागू होती है।
मंत्री ने किया पलटवार
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के दावों पर पलटवार किया है। एक रैली में आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा, 'देखिए भारत को हम लोग मां समझते हैं, मानते हैं, जैसे हमारी मां होते हैं। वैसे जिस मिट्टी ने हमको खिलाया और पिलाया, आज उनको भी हम लोग मां मानते हैं। जो लोग भारत को मां कहने के लिए झिझकते हैं, जो अदालत जाते हैं, उनको देश में रहने का कोई हक नहीं है।'
उन्होंने कहा, 'भारत के संतान सब हैं, सब धर्म के लोग भारत मां के संतान है। वो जो नहीं मानते हैं कि भारत उनका मां है, तो उन लोगों को इस देश में रहने का अधिकार नहीं है। यह देश उनके लिए नहीं है, आप दूसरे देश चले जाइए।' मुसलमानों को निशाना बनाने के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'किसी धर्म के लोगों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। आज भारतीय न्याय संहिता में जो लिखा है, वो सभी के लिए है। क्या हिंदू, क्या मुसलमान... सभी के लिए है। बंगाल में रहना है, तो भारतीय न्याय संहिता को मानना है। अगर नहीं मानना है, तो भारत के बाहर जाना है।'
जमीयत ने लगाए ये आरोप
मौलाना मदनी ने लिखा, 'देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है। समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां तथा एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।'
उन्होंने लिखा, 'देश के वर्तमान हालात, बढ़ती सांप्रदायिकता, संवैधानिक संस्थाओं की चुप्पी, मुसलमानों और इस्लामी प्रतीकों के खिलाफ बढ़ते कदम तथा नफरत आधारित राजनीति अत्यंत चिंताजनक है। हालांकि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा। वह प्रेम से झुक सकता है, लेकिन ताकत, धमकी और अत्याचार के सामने उसे कभी झुकाया नहीं जा सकता। देश में नफरत की राजनीति अब धमकी की राजनीति में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को भयभीत करके उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन बिताने के लिए मजबूर करना है।'
पश्चिम बंगाल सरकार पर साधा निशाना
उन्होंने लिखा, 'पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे 'सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे' संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है। सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना।'
बंगाल सरकार का ऐलान
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की सभा के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का गायन अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार स्कूल शुरू होने पर होने वाली सभा में हर विद्यार्थी के लिए राष्ट्रगीत के गायन में भाग लेना अनिवार्य है। शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा निदेशक द्वारा 13 मई को सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रमुखों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कक्षाओं की शुरुआत से पहले सुबह की सभा में 'वंदे मातरम्' का गायन अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि राज्य के सभी स्कूलों में तत्काल प्रभाव से सभी बच्चे इसे गाएं।
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत प्रावधानों को मजबूत करने की पहल के कुछ समय बाद आया है। केंद्र सरकार ने एक प्रस्ताव रखा है जिससे वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध बन जाएगा।