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काशी से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शनिवार को गोरखपुर के लिए प्रस्थान करेंगी गविष्ठी यात्रा...

काशी से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शनिवार को गोरखपुर के लिए प्रस्थान करेंगी गविष्ठी यात्रा...

-गौमाता की रक्षा एवं प्रतिष्ठा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया बोले-क्या अब गौमांस के व्यापार से ही भारत के उदर की पूर्ति होगी।

वाराणसी, ब्यूरो। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता की रक्षा एवं प्रतिष्ठा को लेकर केन्द्र और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए जितना यत्न भारत में हुआ अगर उतना प्रयास पाकिस्तान में भी होता तो वहां भी गौमाता के प्राणों की रक्षा सुनिश्चित कर उनको राष्ट्रमाता घोषित कर दिया जाता। लेकिन दुर्भाग्य कि भारत में खुद हिंदूवादी कहने वाली सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंग रही है।

शंकराचार्य आज शुक्रवार शाम यहां केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में मीडिया कर्मियों से मुखातिब थे। उन्होंने सवाल किया कि आखिर गौमाता को राष्ट्र माता एवं राज्य माता घोषित कर उनके प्राणों की रक्षा करने में सरकार के समक्ष क्या कठिनाई है? क्या अब गौमांस के व्यापार से ही भारत के उदर की पूर्ति होगी? गौमाता की रक्षा एवं प्रतिष्ठा के लिए सरकार को स्वयं संज्ञान लेकर कानून बनाना चाहिए था। 

जब लोकतंत्र में हर जगह बहुमत से निर्णय होता है तो गौमाता की रक्षा के लिए इस देश का बहुमत बार-बार निवेदन कर रहा है। फिर भी बहुमत की अवज्ञा करने का क्या कारण है? भारत में सभी सनातनी चाहते हैं कि गौमाता राष्ट्रमाता घोषित हों। लेकिन स्वतंत्रता के 78 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी हिंदुओं की आवाज को अनसुनी किया जा रहा है। सरकारों को जिन्होंने हिंदुओं के वोट लेकर उनके साथ छल किया है। अब समय आ गया है कि सनातनी राजनीति का प्रारंभ कर अपने गौमाता के प्राणों एवं सनातनी मूल्यों की रक्षा करें।

-काशी से गविष्ठी यात्रा कल शनिवार को गोरखपुर के लिए प्रस्थान करेंगी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में काशी से गविष्ठी यात्रा शनिवार को गोरखपुर के लिए प्रस्थान करेंगी। शंकराचार्य तीन मई रविवार को गोरखपुर से गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह गविष्ठी यात्रा 403 विधानसभाओं से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान शंकराचार्य सनातनी जनता से संवाद स्थापित करके उनको गौरक्षार्थ श्रेष्ठ योगदान प्रदान करने के लिए प्रेरित करेंगे। 

वार्ता में वैदिक गुरुकुलम के बटुकों के अलावा साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदांबा, किशोर देव शास्त्री, संजय पाण्डेय, ब्रम्हचारी परमात्मानंद आदि भी मौजद रहे।