Headlines
Loading...
यूपी में ग्राम प्रधान पहली बार बनेंगे प्रशासक, पंचायत चुनाव होने तक कार्यकाल; CM योगी आदित्यनाथ ने दी हरी झंडी...

यूपी में ग्राम प्रधान पहली बार बनेंगे प्रशासक, पंचायत चुनाव होने तक कार्यकाल; CM योगी आदित्यनाथ ने दी हरी झंडी...

लखनऊ, ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में प्रशासक समिति के गठन से संबंधित पंचायती राज्य विभाग के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। प्रदेश में पहली बार यह व्यवस्था लागू की जाएगी। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता वाली प्रशासक समिति पंचायत चुनाव होने तक काम करेगी। 

उल्लेखनीय है कि आज ग्राम पंचायतों का कार्यकाल सोमवार को ही समाप्त हो रहा है। पांच वर्ष पहले 2021 में 26 मई को पंचायतों की पहली बैठक हुई थी।

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई तक ही था। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी ग्राम पंचायतों में उनका ही दखल रहेगा। इससे पूर्व मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह व्यवस्था लागू की गई थी। राज्य में अब तक पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने पर एडीओ पंचायत प्रशासक बनाए जाते रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग के ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक का कार्य देने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुमोदित कर दिया है। सोमवार शाम इसका आदेश जारी हुआ। उत्तर प्रदेश में अब पहली बार ग्राम पंचायतों में प्राशासक समिति का गठन होगा।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही पंचायतों का गठन होगा। इसको देखते हुए 26 मई से पहले ग्राम पंचायतों में प्रशासक बनेंगे। यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलें खत्म हो गई हैं। अब पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे।

प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई खत्म हो रहा है। इसके चलते पंचायतीराज विभाग ने प्रधानों को ही प्रशासक बनाने की योजना को मूर्त रुप दे दिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हरी झंडी दे दी है।

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव विधानसभा इलेक्शन 2027 के बाद कराने की तैयारी है। इसी कारण ग्राम सभाओं के प्रशासकों को लेकर फैसला किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का फैसला किया है।

सरकार ने पहली बार प्रधानों को चुनाव तक प्रशासक की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश में अभी तक एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जा रही है। पंचायत चुनाव तक गांवों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी मौजूदा प्रधानों के पास ही रहेगी।

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ ने भी सरकार से यही मांग की थी। सामान्य स्थिति में अब तक चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन हाईकोर्ट की प्रक्रिया और आयोग की रिपोर्ट के कारण चुनाव में करीब एक वर्ष की देरी होने की संभावना है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में विलंब का एक कारण पंचायत मतदाता सूची का पूरी तरह से तैयार नहीं होना भी है। इसकी अंतिम मतदाता सूचनी दस जून को जारी होगी।