मुसलमानों में बढ़ रही बेचैनी...क्यों बोले? कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, CM शुभेंदु अधिकारी से क्या कहा? जानें...
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु आधिकारी सरकार द्वारा पशु वध अधिनियम के सख्ती से पालन के निर्देश जारी करने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। एक ओर मौलवियों की ओर से मुस्लिम समुदाय को सलाह दिए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बहरामपुर से पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने गृह जिले मुर्शिदाबाद (मुस्लिम बहुल क्षेत्र) में इन दिशा-निर्देशों से उत्पन्न बेचैनी को दूर करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नोटिस जारी होने के बाद स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय में खलबली मच गई है।
अधीर रंजन चौधरी ने सुझाव दिया कि विभिन्न समुदायों को बिना किसी संदेह या परेशानी के अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने की अनुमति मिले, इसके लिए जिला प्रशासन को मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील जिलों में पशु वध के लिए विशिष्ट स्थानों की पहचान और सीमांकन करना चाहिए। इन चिह्नित स्थानों का उपयोग केवल पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही हो। उन्होंने इसे अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को दूर करने का आदर्श समाधान बताया।
सरकारी नोटिस के मुख्य प्रावधान
दरअसल, 13 मई को जारी सरकारी सूचना में स्पष्ट किया गया है कि बिना पशु वध के लिए उपयुक्तता प्रमाण-पत्र के किसी भी पशु (बैल, बछड़ा, गाय, बछिया, भैंस आदि) का वध नहीं किया जा सकेगा। वध केवल नगरपालिका के बूचड़खाने या प्रशासन द्वारा अधिकृत स्थान पर ही अनुमत होगा। सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के या चोट, विकृति, उम्र अथवा लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम जानवरों को ही वध के योग्य माना जाएगा।
दरअसल, पश्चिम बंगाल पशु वध अधिनियम 1950 के तहत इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद, 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। सभी अपराध संज्ञेय होंगे। यह नोटिस बकरीद त्योहार से ठीक पहले जारी किया गया है, जब जानवरों की कुर्बानी का सिलसिला चलता है।
नखोदा मस्जिद इमाम का आह्वान
वहीं, कोलकाता की प्रसिद्ध नखोदा मस्जिद के इमाम ने रविवार को मुसलमानों से हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय की कुर्बानी से परहेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की अधिसूचना के कारण उचित बुनियादी ढांचे के अभाव में पशु वध बेहद मुश्किल हो गया है। मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने आगे कहा कि यदि सरकार आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध नहीं करा सकती, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए और उसके वध तथा गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए।