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अगर पूरा देश मान लें PM Modi की बात, फिर लबालब भर जाएगा देश का खजाना, बचेंगे 4.27 लाख करोड़ ₹, जानिए कैसे?...

अगर पूरा देश मान लें PM Modi की बात, फिर लबालब भर जाएगा देश का खजाना, बचेंगे 4.27 लाख करोड़ ₹, जानिए कैसे?...

PM Modi Appeal Impact : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के उपायों में सहयोग की अपील की है। इसके लिए PM Modi ने खासतौर पर सोने की खरीदारी घटाने, कार पूलिंग, वर्क फ्रॉफ होम जैसे उपायों पर जोर दिया है। एक अनुमान के मुताबिक अगर देश में पेट्रोल-डीजल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक जैसे आयातित खर्च पर थोड़ा भी संयम अपनाया जाए, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से मजबूत हो सकता है। अगर पीएम मोदी की अपील जैसा व्यवहारिक बदलाव अपनाया जाए, तो देश को सालाना 45 अरब डॉलर यानी करीब 4,27,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

आयात पर लगाम, तो बड़ी बचत संभव

यह बचत किसी बड़े झटके से नहीं बल्कि मामूली बदलावों से भी संभव है। यदि कच्चे तेल, सोना और खाद्य तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कटौती हो, उर्वरक आयात 50 प्रतिशत घटे और विदेशी यात्रा पर होने वाला गैर-जरूरी खर्च एक साल के लिए रोक दिया जाए, तो कुल बचत 45 अरब डॉलर से भी ऊपर जा सकती है। यही, वह रकम है जो विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

कहां से आएगी सबसे बड़ी बचत

कच्चे तेल के आयात (India Crude Oil Import) में 10 प्रतिशत कमी से करीब 13.5 अरब डॉलर की बचत होगी। सोने की खरीद में इतनी ही कटौती से लगभग 7.2 अरब डॉलर बच सकते हैं। वनस्पति तेल आयात में समान कटौती से करीब 1.95 अरब डॉलर की राहत मिलेगी। उर्वरक आयात आधा होने पर लगभग 7.3 अरब डॉलर की बचत का अनुमान है। इन चारों मदों से ही करीब 30 अरब डॉलर का आयात बिल कम किया जा सकता है।

विदेशी यात्रा पर खर्च रोकने से भी बड़ा फायदा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत होने वाले आउटवर्ड रेमिटेंस में विदेशी यात्रा, छुट्टियों और उससे जुड़े खर्चों की बड़ी हिस्सेदारी है। यदि एक साल तक ऐसे खर्च पर रोक लग जाए, तो करीब 15.8 अरब डॉलर देश के भीतर ही रह सकते हैं। यही वजह है कि पीएम की अपील सिर्फ नैतिक संदेश नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा की रणनीति भी मानी जा रही है।

Forex रिजर्व पर दबाव, रुपये पर भी असर

RBI के आंकड़ों के मुताबिक 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 690.7 अरब डॉलर रहा, जबकि रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में आयात बिल घटाना और गैर-जरूरी विदेशी खर्च सीमित करना नीतिगत रूप से अहम हो जाता है। यदि ये बचत जमीन पर उतरती है, तो विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलने के साथ रुपये पर भी कुछ राहत दिख सकती है।

सीधे शब्दों में कहें तो प्रधानमंत्री की सलाह पर अगर देश उपभोग में थोड़ा संयम दिखाए, तो विदेशी मुद्रा का बहाव थम सकता है। यही वजह है कि 45 अरब डॉलर की संभावित बचत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा संकेत है।