'कॉकरोच जनता पार्टी' X हैंडल पर हुई वैन, लोगों की सरकार से निराशा का संकेत, शशि थरूर बोले- विपक्ष इस मौके को भुना सकता है...
काकरोच जनता पार्टी खुद को एक मजाकिया और व्यंग्यात्मक ग्रुप बताकर लाखों लोगों के बीच ऑनलाइन काफी लोकप्रिय हो गई है। अब इसका असर सिर्फ इंटरनेट पर वायरल होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं की सोच और नाराजगी को भी दिखाने लगा है।'द इंडियन एक्सप्रेस' के साथ एक इंटरव्यू में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बात पर विचार किया कि सीजेपी का यह ट्रेंड देश के युवाओं के मिजाज के बारे में क्या बताता है और मुख्यधारा की राजनीति में यह किन नाकामियों और संभावनाओं की ओर इशारा करता है, साथ ही अन्य मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी राय रखी।
सीजेपी ने इंटरनेट पर धूम मचा दी है। अब इंस्टाग्राम पर इसके 15 मिलियन से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जो बीजेपी और कांग्रेस के फॉलोअर्स से भी ज्यादा हैं। आप इसे किस नजर से देखते हैं?
मुझे लगता है कि यह एक बड़ी बात है, क्योंकि इससे हमें यह पता चलता है कि लोगों में कितनी ज्यादा निराशा और असंतोष है, जिसे वे इस तरह की किसी पहल से जुड़कर जाहिर कर पा रहे हैं। जाहिर है, यह एक अचानक उठाया गया कदम था, लेकिन यह बहुत तेजी से वायरल हो गया। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में यह एक बहुत ही अच्छी बात है कि लोगों के पास अपनी इच्छाओं को जाहिर करने के अलग-अलग तरीके होते हैं और कोई ऐसी चीज जो व्यंग्यात्मक और मजेदार होने के साथ-साथ बेहद गंभीर भी हो, वह युवाओं की कुंठाओं को बाहर निकालने का एक बेहतरीन जरिया है।
NEET परीक्षा जाहिर तौर पर वह आखिरी तिनका साबित हुई जिसने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया, लेकिन मुझे लगता है कि इसके साथ-साथ बेरोजगारी, जीवन में सीमित अवसरों, शिक्षा, बढ़ती महंगाई और इन सब से निपटने की चुनौतियों को लेकर भी लोगों में आम तौर पर असंतोष था। फिर जब NEET (पेपर लीक) की घटना हुई, तो खासकर वे लाखों बच्चे जिन्होंने इसकी तैयारी में सालों बिताए थे, उन्हें जरूर लगा होगा कि अब उनकी सारी मेहनत बेकार चली गई। उनके लिए अचानक यह एहसास होना कि उन्हें यह सब कुछ फिर से दोहराना पड़ेगा, यकीनन बेहद दिल तोड़ने वाला अनुभव रहा होगा।
मुझे पता चला है कि चार युवाओं ने आत्महत्या कर ली है और अन्य लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर मामला है। मेरा मतलब है कि, जाहिर तौर पर युवा पीढ़ी अब यह कह रही है कि अब बहुत हो चुका और मुझे लगता है कि यह सुनना कि ‘X’ (ट्विटर) हैंडल को बंद कर दिया गया है, मेरी नजर में एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण कदम है, क्योंकि एक लोकतंत्र में हमें अपनी बात रखने के लिए ऐसे मंचों (outlets) की जरूरत होती है। किसी भी लोकतंत्र में, हमें असल में ऐसे मंचों की जरूरत होती है जो लोगों को अपनी कुंठाओं और शिकायतों को खुलकर व्यक्त करने का अवसर प्रदान कर सकें।
इससे विपक्ष की स्थिति के बारे में क्या पता चलता है?
मुझे यह बात बहुत पसंद है कि मीडिया लगातार विपक्ष को दोषी ठहराता है। जैसा कि आप जानते हैं, असंतोष अक्सर उन परिस्थितियों से होता है जिनके लिए अंततः सरकार ही जिम्मेदार होती है और इसीलिए मुझे लगता है कि विपक्ष को दोषी ठहराना कुछ हद तक, बल्कि काफी हद तक अनुचित है, लेकिन मैं आपसे सहमत हूं कि विपक्ष इसका फायदा उठाएगा। वह अब इन सभी मुद्दों को देख रहा है। वह देख रहा है कि लोग कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मुझे लगता है कि विपक्ष ने नीट और अन्य मुद्दों को पहले ही बड़ा मुद्दा बना लिया है, बेरोजगारी और महंगाई विपक्ष के क्लासिक मुद्दे हैं जिनका वह बार-बार जिक्र करता रहा है। मैं यह नहीं कहूंगा कि विपक्ष के लिए भी इसी लहर का फायदा उठाने की कोई संभावना नहीं है।
हाल के विधानसभा चुनावों विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में, यह देखने को मिला कि लोग बदलाव के लिए तरस रहे हैं। तमिलनाडु में, दो पुरानी और स्थापित पार्टियों को सत्ता से बाहर कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कम से कम युवाओं के बीच तो एक तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है।
सही। और सच तो यह है कि विजय की जीत को Gen Z की जीत कहना शायद काफी हद तक सही है। उनके ज्यादातर वोटर्स 30 साल से कम उम्र के प्रतीत होते हैं और यह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी बेचैन है, निराशाओं का सामना कर रही है और विकल्पों की तलाश में है।
विपक्ष को इस मामले में लापरवाह नहीं होना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि वे केवल सत्ताधारी पार्टी से ही नहीं बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था से निराश हों। और मुझे लगता है कि हमें इन सभी बातों का जवाब देने में सक्षम होना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि हम ऐसा कर सकते हैं। अब सवाल यह है कि उस पीढ़ी के सदस्यों के साथ अधिक से ज्यादा संवाद स्थापित किया जाए। इसीलिए मुझे लगता है कि वेबसाइट बंद करना एक गलती है, लेकिन इंस्टाग्राम अभी भी उपलब्ध है। उनसे वहां संवाद स्थापित करें और देखें कि हम उनके मुद्दों का रचनात्मक समाधान खोजने के लिए उनके साथ मिलकर क्या कर सकते हैं।
क्या विपक्ष को कुछ हटकर करना चाहिए, युवाओं को सही दिशा देने के लिए एक नई तरह की राजनीति अपनानी चाहिए?
नहीं, मुझे लगता है कि विपक्ष के सामने चुनौती इस असंतोष को मुख्यधारा की राजनीति में बदलना होगा। किसी ऐसी राजनीतिक पार्टी में जाने के बजाय जो चुनाव लड़ने के लिए संगठित नहीं है, विपक्ष के पास इस असंतोष को मुख्यधारा की राजनीति में, चुनावी बदलाव में और मतदान में अलग परिणाम लाने में परिवर्तित करने का अवसर है। इसलिए, अब हमें एक ऐसा संदेश देना होगा जो इस तरह महसूस करने वाले लोगों को हमारे लिए वोट देने के लिए आमंत्रित करे।
व्यंग्यकारों के इस समूह के संदेश से ऐसा लगता है कि राजनीतिक व्यवस्था से ही मोहभंग हो चुका है और इसमें सत्ताधारी और विपक्ष दोनों ही शामिल हैं।बिल्कुल सही। नहीं, लेकिन यह एक बेकार की हताशा है, क्योंकि इससे ऐसे कोई असरदार नतीजे नहीं निकलेंगे जिनसे उनकी जिंदगी बेहतर हो सके। इसके उलट, अगर वे विपक्ष के साथ और आम तौर पर सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ, जिसमें सत्ताधारी पार्टी भी शामिल है, मिलकर काम करें, तो उन्हें ऐसे नतीजे मिल सकते हैं जिनसे उनकी जिंदगी में सचमुच कोई ठोस बदलाव आएगा।
(उदाहरण के लिए), NEET में सुधार। मैंने उनकी वेबसाइट पर उनके घोषणापत्र के कुछ प्रस्तावों को बहुत तेजी से देखा है। इनमें से कई बातों पर चर्चा की जा सकती है और उन्हें लागू भी किया जा सकता है और जिन बातों को सरकार लागू नहीं करेगी, विपक्ष उनका समर्थन कर सकता है। ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें हम कर सकते हैं। मेरा मतलब है कि, इसके लिए आपस में बातचीत और जुड़ाव होना जरूरी है। जाहिर है, इस जुड़ाव की शुरुआत हमारी तरफ से ही होनी चाहिए, क्योंकि हम ही सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हैं।
क्या आपको लगता है कि विपक्ष का राजनीतिक संदेश युवाओं को आकर्षित नहीं कर रहा है?
नहीं, मैं ऐसा नहीं कहूंगा। देखिए, यह कोई अनोखी बात नहीं है कि विपक्षी पार्टियां कभी-कभी किसी माहौल को इतनी मौलिकता से पकड़ने में उतनी फुर्तीली नहीं होतीं, जितना कि व्यंग्यात्मक सोच वाला कोई व्यक्ति होता है। क्योंकि यह पारंपरिक राजनीति नहीं है। लेकिन, अभिजीत दिपके नाम के इस युवा ने जो किया है, उससे मुझे लगता है कि उसने हम बाकी लोगों को भी एक राह दिखाई है कि एक ऐसा अवसर मौजूद है जिसे लपकने की जरूरत है।