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मगहर से काशी तक गूंजेगी कबीर वाणी, 27 जून से 29 जून तक 3 दिवसीय 'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' का होगा आगाज...

मगहर से काशी तक गूंजेगी कबीर वाणी, 27 जून से 29 जून तक 3 दिवसीय 'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' का होगा आगाज...

वाराणसी। संत कबीर की वाणी, निर्गुण भक्ति और भारतीय लोक-सांस्कृतिक परंपरा की समृद्ध विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संत कबीर अकादमी, मगहर द्वारा कबीर जयंती के अवसर पर 27 से 29 जून तक तीन दिवसीय 'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। 

मगहर, गाजीपुर और वाराणसी में आयोजित होने वाले इस उत्सव में देशभर के प्रतिष्ठित संत, विद्वान, लोक कलाकार और कबीर गायन परंपरा से जुड़े समूह सहभागी होंगे। भक्ति, संगीत, साहित्य और चिंतन का यह आयोजन कबीर की विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

उत्सव का शुभारंभ 27 जून को संत कबीर अकादमी, मगहर में भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। कार्यक्रम में पद्मश्री कालूराम बामनिया, बेबी सिसोदिया, बंजारन सिस्टर्स, देवेन्द्र दास ताना-बाना ग्रुप, ओम प्रकाश पटेल, दिनेश कुमार जांगड़े और प्रीति बामनिया सहित कई ख्यातिप्राप्त कलाकार निर्गुण भक्ति और कबीर गायन की प्रस्तुतियां देंगे।

दूसरे दिन 28 जून को कबीर मठ बेलसड़ी, गाजीपुर में निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव का आयोजन होगा। यहां पद्मश्री भेरूसिंह चौहान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार कबीर वाणी और निर्गुण भक्ति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। वहीं 28 और 29 जून को वाराणसी स्थित संत कबीर की प्राचीन प्राकट्य स्थली लहरतारा में 'कबीर की विरासत : काशी से मगहर तक' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, साहित्यकार, इतिहासकार और शोधकर्ता कबीर के दर्शन, साहित्य और सामाजिक योगदान पर अपने विचार रखेंगे।

29 जून को लहरतारा, वाराणसी में आयोजित होगा विशेष समारोह 

29 जून को लहरतारा, वाराणसी में आयोजित होगा विशेष समारोह इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा। इस अवसर पर संत समाज के प्रमुख धर्माचार्यों और विद्वानों का आशीर्वचन प्राप्त होगा। शाम को आयोजित निर्गुण सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपान्या की विशेष प्रस्तुति के साथ जय पाण्डेय, देवेन्द्र दास, बेबी सिसोदिया, बंजारन सिस्टर्स, प्रीति बामनिया और दिनेश कुमार जांगड़े जैसे कलाकार कबीर की वाणी को स्वर देंगे। निर्गुण भक्ति, लोकसंगीत और संत परंपरा का यह संगम दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति प्रदान करेगा।

इस आयोजन पर अपने विचार प्रकट करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संत कबीर की वाणी आज भी समाज को समानता, मानवता, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि 'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' जैसे आयोजन संत कबीर की शिक्षाओं और निर्गुण भक्ति परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत, संत परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों, विद्वानों और संत समाज को एक साझा मंच मिलता है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक जागरूकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूती मिलती है।