चलने के लिए दो लोगों का सहारा. पर 34 साल पुराना गुनाह नहीं भूला कानून: बिहार के 84 वर्षीय बुजुर्ग को हुई जेल...
बैशाली, बिहार। कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं और वो तब तक पीछा नहीं छोड़ते जब तक इंसाफ न हो जाए। बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो इस बात की जीती-जागती मिसाल है। जिस 84 साल की उम्र में लोग घर के आंगन में आराम करते हैं या भगवान की भक्ति में समय बिताते हैं, उस उम्र में एक बुजुर्ग को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। 34 साल पुराने एक खूनी संघर्ष के मामले में अदालत ने अब जाकर अपना आखिरी फैसला सुनाया है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना साल 1992 की है, जो वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत जुड़ावनपुर इलाके में घटी थी। तब 'अदालत राय' नाम के एक शख्स अपनी पत्नी रामशकी देवी के साथ अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान दीप राय नाम का व्यक्ति अपने पूरे परिवार के साथ लाठी-डंडे और हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचा। विवाद तब शुरू हुआ जब दीप राय उनके रास्ते पर कांच के टुकड़े बिछाने लगा। जब अदालत राय और उनकी पत्नी ने इस हरकत का विरोध किया, तो दीप राय और उसके परिजनों ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस मामले में पुलिस ने एक ही परिवार के 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
4 आरोपियों की हो चुकी है मौत, अकेले बचे दीप राय
मुकदमा दर्ज होने से लेकर फैसले तक 34 साल बीत गए। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान केस के 5 आरोपियों में से 4 की मौत हो चुकी है। अब सिर्फ एक आरोपी जीवित बचा, जिसका नाम दीप राय है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई करने के बाद दीप राय को आईपीसी की धारा 147, 148, 307 (हत्या का प्रयास) और 134 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया है।
शरीर कांप रहा है, पर गुनाह का साया साथ खड़ा है
इस मामले की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए 84 वर्षीय दीप राय का शरीर अब उनका साथ नहीं दे रहा है। हालत यह है कि उन्हें चलने और उठने-बैठने के लिए भी दो लोगों के सहारे की जरूरत पड़ रही है। बुढ़ापे की इस लाचारी और बेबसी के बावजूद, कानून के डंडे ने उन्हें कोई राहत नहीं दी।