स्मार्ट क्लास ही नहीं, सक्षम नेतृत्व से बदलेगी स्कूलों की तस्वीर; मिशन मोड में हो रही ARP, SRG और ECCE एजुकेटर्स की तैनाती...
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए देश का सबसे व्यापक अकादमिक ढांचा तैयार कर रही है। राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा में स्थायी और सकारात्मक बदलाव केवल भव्य भवनों, स्मार्ट क्लास या बुनियादी सुविधाओं से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से ही संभव है।
इसी सोच के तहत प्रदेश में अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), ECCE एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया है।
वाराणसी उपलब्धता में प्रदेश में सबसे आगे
अब स्कूलों में तैनात होने वाले एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) केवल निरीक्षण करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे शिक्षकों को क्लासरूम में आ रही दिक्कतों को दूर करने और बच्चों के सीखने के स्तर को सुधारने में सीधे मदद करेंगे। इस मुहिम में वाराणसी जिला 100 प्रतिशत एआरपी उपलब्धता के साथ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके अलावा देवरिया और हाथरस 98%, बस्ती व कौशाम्बी 95%, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94% और कुशीनगर 93% उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं, जहां रिक्तियां तेजी से भरी जा रही हैं।
निपुण भारत मिशन को मिलेगा मजबूत प्रशासनिक आधार
बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता के लक्ष्यों को समय से हासिल करने के लिए योगी सरकार 'जिला समन्वयक (निपुण)' की नियुक्तियों को तेजी से अंतिम रूप दे रही है। प्रदेश के 39 जनपदों में चयन की यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी बचे जिलों में इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और वित्तीय मूल्यांकन जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाएं अपने अंतिम चरण में हैं। इन अधिकारियों की तैनाती से डेटा आधारित मॉनिटरिंग और शिक्षक प्रशिक्षण को एक नई गति मिलेगी।
समावेशी शिक्षा पर जोर: एसआरजी और विशेष शिक्षकों की तैनाती
राज्य स्तर पर शैक्षणिक नवाचारों (Educational Innovations) और प्रशिक्षण को धार देने के लिए एसआरजी (स्टेट रिसोर्स ग्रुप) व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही, योगी सरकार समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को मजबूत करने के लिए विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। इसका सीधा लाभ दिव्यांग बच्चों को मिलेगा, जिससे समाज के हर वर्ग के विद्यार्थी तक बिना किसी भेदभाव के समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सकेगी।
NEP-2020 के तहत ईसीसीई एजुकेटरों से सुधरेगी बुनियादी शिक्षा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मानकों के अनुरूप बच्चों की शुरुआती शिक्षा को पुख्ता करने के लिए 'ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर' की नियुक्तियां भी रफ्तार पकड़ चुकी हैं। पहले चरण में कई जिलों में बड़ी संख्या में एजुकेटरों ने कार्यभार संभाल लिया है, वहीं दूसरे चरण की निविदा और मेरिट सूची की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस कदम से आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों के बीच का शैक्षणिक तालमेल मजबूत होगा और बच्चों को बचपन से ही सीखने का बेहतर माहौल मिल सकेगा।