Headlines
Loading...
अब लॉकर में रखा सोना देगा रेगुलर इनकम बिना बेचे हर महीने होगी तगड़ी कमाई, जानिए क्या है? 'गोल्ड लीजिंग' का ये सुपरहिट फॉर्मूला, जानें...

अब लॉकर में रखा सोना देगा रेगुलर इनकम बिना बेचे हर महीने होगी तगड़ी कमाई, जानिए क्या है? 'गोल्ड लीजिंग' का ये सुपरहिट फॉर्मूला, जानें...

आमतौर पर भारतीय परिवारों में सोना (Gold) सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि मुसीबत के समय काम आने वाला एक बड़ा वित्तीय सहारा माना जाता है। ज्यादातर लोग सोना खरीदकर उसे घर की तिजोरी या बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख देते हैं।लेकिन लॉकर में रखा यह सोना तब तक आपको कोई कमाई करके नहीं देता, जब तक कि आप उसे बेच न दें या उस पर लोन न ले लें। उल्टा, बैंक लॉकर की सुरक्षा के लिए आपको हर साल जेब से चार्ज देना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब एक ऐसा सुपरहिट फॉर्मूला आ चुका है, जिससे आपका यह 'डेड एसेट' आपको हर महीने ब्याज़ के रूप में बंपर कमाई करके दे सकता है, और इसके लिए आपको अपना सोना बेचने की भी जरूरत नहीं है? इस जादुई फॉर्मूले को वित्तीय भाषा में 'गोल्ड लीजिंग' (Gold Leasing) कहा जाता है।

क्या है गोल्ड लीजिंग? जानें 

गोल्ड लीजिंग का सीधा और आसान मतलब है अपने सोने को किराए (Lease) पर देना। जिस तरह आप अपनी दुकान, मकान या गाड़ी को किसी दूसरे व्यक्ति को किराए पर देते हैं और उसके बदले हर महीने किराया वसूलते हैं, ठीक वैसे ही आप अपने सोने को भी लीज पर दे सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कुछ फिनटेक कंपनियां (जैसे Gullak, SafeGold आदि) इस तरह की सुविधाएं दे रही हैं। ये कंपनियां आपके सोने को देश के बड़े और प्रतिष्ठित ज्वेलर्स (जौहरियों) को लीज पर देती हैं, जिन्हें अपने कारोबार या निर्माण के लिए हर दिन भारी मात्रा में सोने की जरूरत होती है।

कितना मिलता है ब्याज?

गोल्ड लीजिंग के जरिए निवेशक अपने सोने पर सालाना 4% से लेकर 6% तक का अतिरिक्त ब्याज़ (Gold Volume के रूप में) कमा सकते हैं। मजे की बात यह है कि आपको यह ब्याज़ रुपये में मिलने के बजाय सोने के रूप में ही मिलता है। यानी अगर आपने 100 ग्राम सोना लीज पर दिया है और उस पर 5% का सालाना ब्याज़ मिल रहा है, तो साल के अंत में आपका सोना बढ़कर 105 ग्राम हो जाएगा। इस तरह आपको दोधरा फायदा मिलता है एक तो आपके सोने की मात्रा बढ़ती है और दूसरा, बाजार में सोने की कीमतें बढ़ने पर आपके निवेश की वैल्यू भी अपने आप बढ़ती जाती है।

क्या है रिस्क?

सुनने में यह स्कीम जितनी आकर्षक लगती है, एक समझदार निवेशक के तौर पर इसके साथ जुड़े जोखिमों (Risks) को समझना भी उतना ही जरूरी है। गोल्ड लीजिंग में सबसे बड़ा जोखिम 'क्रेडिट रिस्क' (Credit Risk) या डिफॉल्ट का होता है। इसका मतलब यह है कि जिस ज्वेलर ने आपका सोना लीज पर लिया है, यदि वह दिवालिया हो जाता है या किसी वित्तीय संकट में फंसकर सोना लौटाने में असमर्थ रहता है, तो आपके निवेश पर संकट आ सकता है। हालांकि, जो प्लेटफॉर्म्स यह सर्विस देते हैं, उनका दावा होता है कि वे केवल स्थापित, विश्वसनीय और 'ए-रेटेड' कॉर्पोरेट ज्वेलर्स (जैसे तनिष्क, कल्याण ज्वेलर्स आदि) को ही सोना लीज पर देते हैं और इसके लिए सुरक्षा के तौर पर बैंक गारंटी या 100% कॉर्पोरेट गारंटी भी लेते हैं, फिर भी यह निवेश पूरी तरह से जोखिम-मुक्त नहीं कहा जा सकता।