अब यूपी में योगी सरकार लागू करने जा रही नया नियम, अब इन वाहनों को नहीं मिलेगा डीजल-पेट्रोल...
No PUC No Fuel: दिल्ली उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर साल सर्दियों के दस्तक देते ही हवा जहरीली होने लगती है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने समय से पहले ही एक बेहद कड़ा बड़ा प्लान तैयार कर लिया है.सरकार का सीधा लक्ष्य इस साल एनसीआर के आसमान को साफ करना वायु प्रदूषण के स्तर में करीब 30 से 35 प्रतिशत तक की भारी कमी लाना है।
संबंधित सरकारी विभागों को सख्त निर्देश
इसके लिए सभी संबंधित सरकारी विभागों को आपस में तालमेल बिठाकर समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी असरदार बात यह है कि आगामी एक अक्टूबर से एनसीआर के सभी 1,041 पेट्रोल पंपों पर 'नो प्रदूषण प्रमाणपत्र, नो फ्यूल' यानी बिना पीयूसी के तेल न मिलने की व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं
इस महायोजना को जमीन पर उतारने के लिए मुख्य सचिव एसपी गोयल की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई. इस बैठक में साफ किया गया कि प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर नजर रखने के लिए अब किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार अब पूरी व्यवस्था को डिजिटल बनाने जा रही है।
होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
इसके तहत सभी प्रमुख गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी. इसके लिए विशेष पोर्टल, मोबाइल एप्लीकेशन, गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम एक एकीकृत डैशबोर्ड का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है. इससे अधिकारी एक ही जगह बैठकर देख सकेंगे कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन कहां हो रहा है कहां लापरवाही बरती जा रही है।
खटारा वाहन कर रहे हवा खराब
एनसीआर की हवा खराब करने में सबसे बड़ा हाथ सड़कों पर दौड़ रहे पुराने खटारा वाहनों का है. जांच में सामने आया है कि एनसीआर के अलग-अलग जिलों में करीब 26.19 लाख ऐसे वाहन मौजूद हैं जो अपनी तय समय सीमा पूरी कर चुके हैं. इन गाड़ियों को सड़कों से हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. इस साल की शुरुआत में जनवरी से अप्रैल के बीच ही 37 हजार से ज्यादा वाहनों को कबाड़ यानी स्क्रैप में बदला जा चुका है सैकड़ों गाड़ियों को जब्त किया गया है।
सार्वजनिक परिवहन को दिया जा रहा बढ़ावा
पुरानी गाड़ियों की जगह अब पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी के तहत गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा मेरठ जैसे बड़े शहरों में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से शुरुआती चरण की बसें सड़कों पर उतर भी चुकी हैं।
लगाई गई सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली
गाड़ियों के धुएं के साथ-साथ फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक धुआं भी हवा को दमघोंटू बनाता है. सरकार ने एनसीआर के इलाकों में 725 ऐसे उद्योगों की पहचान की है जो सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं. इन फैक्ट्रियों पर लगाम कसने के लिए इनमें से 613 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगा दी गई है।
बनाए जाएंगे 43 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन
इस सिस्टम को सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य सर्वर से जोड़ दिया गया है, जिससे उद्योगों से निकलने वाले धुएं की मात्रा पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रखी जा सके. इसके अलावा हवा की शुद्धता को मापने के लिए एनसीआर में कुल 43 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन बनने हैं, जिनमें से ज्यादातर काम करना शुरू कर चुके हैं बाकी बचे स्टेशनों को भी अक्टूबर महीने तक पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा।
धूल को रोकने के लिए भी उठाए जा रहे प्रमुख कदम
सड़कों पर उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण की एक बहुत बड़ी वजह है. धूल को उड़ने से रोकने के लिए गाजियाबाद, मेरठ नोएडा प्राधिकरण मिलकर करीब 1,792 किलोमीटर लंबी सड़कों का पुनर्विकास कर रहे हैं. इस भारी-भरकम काम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने जा रही है. सड़कों को साफ रखने के लिए मशीनों से सफाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है, जिसके लिए नई मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें खरीदी जा रही हैं।
कलेक्शन सेंटर भी बनाए गए
इसके साथ ही शहरों में बनने वाली पुरानी इमारतों के मलबे निर्माण सामग्री को खुले में फेंकने पर रोक लगा दी गई है. इसके लिए दर्जनों की संख्या में कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं मलबे को ले जाने वाले ट्रकों पर जीपीएस ट्रैकिंग जियो-टैगिंग के जरिए नजर रखी जा रही है ताकि कोई भी रात के अंधेरे में सड़क किनारे कचरा न गिरा सके।