न विकेट, न रन, न कैच लिया..फिर भी चुना गया प्लेयर ऑफ द मैच, क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा अजूबा है ये...
एजेंसी स्पोर्ट्स डेस्क। किसी क्रिकेट मैच में एक खिलाड़ी को प्लेयर ऑफ द मैच तब चुना जाता है, जब वह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है। चाहे वह शतक लगाना हो, किसी गेंदबाज द्वारा पंजा खोलना (यानी पांच या उससे ज्यादा विकेट लेना) हो या फिर फील्डिंग में कोई असाधारण प्रदर्शन करना हो.लेकिन क्या हो अगर किसी खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए प्लेयर ऑफ द मैच चुन लिया जाए कि उसने बिना कोई विकेट लिए बेहद कसी हुई गेंदबाजी की थी?
जी हां, क्रिकेट के इतिहास में ऐसा हो चुका है जब एक खिलाड़ी को बिना कोई रन बनाए, बिना कोई विकेट लिए और फील्डिंग में भी बिना कोई कैच या रन-आउट किए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था।
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन साल 2001 में वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए एक वनडे मैच में ऐसा ही हुआ था. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज कैमरन कफी को इसलिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था, क्योंकि उन्होंने अपनी टीम के लिए 10 ओवर में 2 मेडन रखते हुए सिर्फ 20 रन खर्च किए थे. कफी की इस कसी हुई गेंदबाजी के कारण ही मैच का पासा पलट गया था और वेस्टइंडीज ने एक रोमांचक जीत दर्ज की थी।
जिम्बाब्वे के आगे वेस्टइंडीज की हालत थी खराब
बता दें कि जिस मैच में कैमरन कफी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था, उसमें लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्बाब्वे ने वेस्टइंडीज के पसीने छुड़ा दिए थे. मुकाबले में वेस्टइंडीज की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डैरेन गंगा, क्रिस गेल और शिवनारायण चंद्रपॉल की अर्धशतकीय पारियों की बदौलत 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 266 रन बनाए थे. आज से करीब 25 साल पहले वनडे क्रिकेट में इस स्कोर को एक मजबूत और फाइटिंग टोटल माना जाता था।
वेस्टइंडीज के 266 रनों के जवाब में जिम्बाब्वे की शुरुआत कुछ खास नहीं रही थी. टीम ने सिर्फ 18 रन के स्कोर पर अपना पहला विकेट गंवा दिया था. हालांकि, ओपनर एलिस्टेयर कैंपबेल एक छोर पर डटे हुए थे, लेकिन दूसरे छोर से नियमित अंतराल पर विकेट गिर रहे थे. एक समय ऐसा लगा कि वेस्टइंडीज आसानी से इस मैच को जीत लेगी, लेकिन जिम्बाब्वे के मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने छोटी मगर उपयोगी पारियां खेलकर मैच को बेहद रोमांचक बना दिया।
कफी ने कसी हुई गेंदबाजी से बचाया मैच
वेस्टइंडीज की तरफ से इस मैच में मार्लोन सैमुअल्स और मर्विन डिलन ने सबसे ज्यादा तीन-तीन विकेट लिए. डिलन ने इसके लिए 48 रन खर्च किए, तो सैमुअल्स ने 5 ओवर में 28 रन दिए. इसके अलावा रिओन किंग सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए, जिन्होंने अपने कोटे में 57 रन लुटाए. इन सबके बीच कैमरन कफी ने अपनी सटीक गेंदबाजी से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर नकेल कस दी. 10 ओवर के स्पेल में कफी ने विपक्षी टीम को रन बनाने के लिए तरसा दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि मैच जिम्बाब्वे के हाथ से निकल गया और टीम 50 ओवर में 9 विकेट पर 239 रन ही बना सकी, जिससे वेस्टइंडीज ने यह मुकाबला 27 रन से जीत लिया।
कैसा रहा कैमरन कफी का करियर?
कैमरन कफी के करियर की बात करें तो उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए कुल 15 टेस्ट और 41 वनडे मैच खेले. टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 43 विकेट दर्ज हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 41 विकेट अपने नाम किए. हालांकि, कफी का अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ कोका-कोला कप के उस ऐतिहासिक मैच के कारण उनका नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।