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नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण व धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी? मोदी कैबिनेट में होने जा रहा अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर...

नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण व धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी? मोदी कैबिनेट में होने जा रहा अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर...

नईदिल्ली, न्यूज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बहुत जल्द एक बड़ा भूचाल आने वाला है। सियासी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल का पहला और सबसे बड़ा मंत्रिमंडल फेरबदल करने की पूरी तैयारी में है।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बड़े बदलाव के जरिए देश के सामने अपना अगला बड़ा राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश करेगी।

इस महा-बदलाव को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है और माना जा रहा है कि कई चौंकाने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। दिल्ली की राजनीतिक हवाओं में इस बात की जोरों से चर्चा है कि मंत्रिमंडल में यह फेरबदल अगले एक से दो दिनों के भीतर ही देखने को मिल सकता है।

यूपी मॉडल पर होगी दिल्ली में सोशल इंजीनियरिंग

इस बड़े फेरबदल का पहला साफ संकेत भाजपा के उत्तर प्रदेश संगठन में हाल ही में किए गए बड़े बदलावों से मिल चुका है। यूपी की नई टीम को बेहद फूंक-फूंक कर और सावधानी से तैयार किया गया है, ताकि समाज के सभी प्रमुख सामाजिक समूहों और जातियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके। बीजेपी अब इसी सफल सोशल इंजीनियरिंग के मॉडल को केंद्रीय कैबिनेट में भी दोहराने जा रही है। इसका सीधा मकसद आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ को और ज्यादा मजबूत करना है।

धर्मेंद्र प्रधान पर गिर सकती है गाज, बदलेंगे दिग्गजों के विभाग

मंत्रिमंडल के इस संभावित फेरबदल में जिस नाम पर सबसे ज्यादा नजरें टिकी हैं, वो हैं देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। पिछले कुछ समय से देश में 'NEET' प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए भारी बवाल और देशव्यापी विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस बड़े विवाद के चलते उन पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है और उनसे शिक्षा मंत्रालय वापस लिया जा सकता है।

इसके अलावा, सरकार के कुछ सबसे कद्दावर और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के प्रभारियों के पोर्टफोलियो में भी भारी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। इस रेस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जिनके विभागों को बदला जा सकता है।

पंजाब और सिखों को साधने की बड़ी तैयारी

कैबिनेट विस्तार में इस बार पंजाब और सिख समुदाय को विशेष तवज्जो मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। चर्चा है कि वर्तमान में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह किसी अन्य कद्दावर सिख चेहरे या पंजाब के किसी बड़े नेता को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इस रेस में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम राघव चड्ढा का चल रहा है। 
गौरतलब है कि जब से देश में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से केंद्रीय कैबिनेट में पंजाब को अपेक्षाकृत काफी सीमित प्रतिनिधित्व मिला है। आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार पंजाब की हिस्सेदारी को हर हाल में बढ़ाना चाहती है।

क्या शक्तिकांत दास बनेंगे देश के नए वित्त मंत्री?

इस फेरबदल में सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाले कयास नौकरशाही और देश की आर्थिक नीति के स्तर पर लगाए जा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और वर्तमान में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास को सीधे कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल करने की चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें निर्मला सीतारमण की जगह देश का नया वित्त मंत्री बनाने की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

सहयोगी दलों की होगी बंपर एंट्री, नीतीश पर अभी है सस्पेंस

गठबंधन सरकार के गणित को एकदम दुरुस्त रखने और दूसरे राज्यों के सियासी समीकरणों को साधने के लिए कुछ नए और कद्दावर चेहरों की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है। बता दें कि श्रीकांत शिंदे ही वो नेता हैं जिन्होंने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों को तोड़कर एनडीए (NDA) के पाले में लाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

वहीं, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी खुद मोदी कैबिनेट का हिस्सा बन सकते हैं, जिससे बिहार में एनडीए की पकड़ को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। हालांकि, अगर वह खुद कैबिनेट में शामिल नहीं होते हैं, तो उनकी पार्टी से उनके किसी बेहद करीबी को जगह दी जा सकती है।

इसके साथ ही, तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर बीजेपी में आए सुखेंदु शेखर राय को भी इस फेरबदल में बड़ा इनाम मिल सकता है, जिससे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी को एक मजबूत और कद्दावर चेहरा मिल जाएगा। हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि इस महा-पुनर्गठन को लेकर अभी तक सरकार या संगठन की ओर से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है, लेकिन दिल्ली के सियासी गलियारों की हलचल यह साफ बता रही है कि पीएम मोदी 2026 के उत्तरार्ध में अपनी सरकार को एक बिल्कुल नया, युवा और आक्रामक रूप देने के पूरे मूड में हैं।