अयोध्या राममंदिर: चढ़ावा गबन के खेल में जो न हो शामिल, उसे मिलती थी अयोध्या छोड़ने की धमकी, CCTV से आठ महीने का डेटा डिलीट...
अयोध्या, न्यूज। राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में हेराफेरी किए जाने के साथ ही इससे जुड़े साक्ष्यों को मिटाने का खेल भी लंबे समय से चल रहा था। गबन के खेल में जो ट्रस्ट कर्मी नहीं शामिल होते थे, उन्हें निकाल दिया जाता था या फिर धमकियां देकर अयोध्या छोड़ने को मजबूर किया जाता था। यह तथ्य न केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में साबित होता नजर आ रहा है, बल्कि पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह व ट्रस्ट के इंजीनियर रहे प्रयागराज के दीनानाथ वर्मा के बयान भी इसे प्रमाणित कर रहे हैं।
महिपाल सिंह के दावे तब सत्य होते दिखे, जब एसआईटी जांच में गणना कक्ष के सीसी कैमरों की फुटेज केवल डेढ़ माह की मिली। टीम ने डिलीट किए गए पुराने डेटा को रिकवर कराने और छेड़छाड़ की जांच के लिए इसे दिल्ली स्थित प्रयोगशाला में भेजा है।
पूरे सिस्टम को बदलने की आवश्यकता
दानराशि में चोरी का प्रकरण पांच जून को सामने आने के बाद से अब तक कई तथ्य व पूर्व कर्मियों के बयान सामने आ चुके हैं। यहां तक कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी मीडिया के सामने आकर इसकी स्वीकारोक्ति कर चुके हैं। उन्होंने भी दानराशि के संग्रहण में हुई वित्तीय पारदर्शिता की चूक को स्वीकारा है और पूरे सिस्टम को बदलने की आवश्यकता जताई है।
इससे पहले ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने सामने आकर यह दावा पहले ही कर दिया था कि मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू ने गणना कक्ष के सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ करके आठ महीने का डेटा डिलीट करा दिया था। उन्होंने विरोध किया तो उन्हें निकलवा दिया गया और धमकियां दी गईं।
प्रकरण ने तूल पकड़ा तो 13 जून को राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच शुरू करा दी। छह दिनों की जांच में यह प्रमाणित हो गया कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई है।
इसी बीच शुक्रवार को ट्रस्ट के पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा भी सामने आ गए और उन्होंने निर्माण सामग्री के बिल पर ट्रस्टी डाॅ. अनिल मिश्र के 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी।
वर्मा ने यह भी बताया कि वह जब विरोध करने लगे तो उन्हें गणना में लगा दिया गया। वहां भी जब विरोध किया तो अयोध्या छोड़ देने की धमकियां दी गईं। इससे स्पष्ट है कि गबन का यह खेल वर्षों से चल रहा था। इसे अपने रिश्तेदारों व परिचिताें को भर्ती करा कर अनुकल्प मिश्रा गति देता रहा।