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हत्या के प्रयास मामले में कांग्रेस नेता की सजा इलाहाबाद HC में निलंबित, वाराणसी की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था...

हत्या के प्रयास मामले में कांग्रेस नेता की सजा इलाहाबाद HC में निलंबित, वाराणसी की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था...

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल की सजा पाने वाले वाराणसी निवासी कांग्रेस नेता डॉ. मनीष कुमार उपाध्याय की सजा निलंबित कर दी है।यह आदेश न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने दिया है।

कोर्ट ने 22 मई को दिए गए आदेश में सुधार किया

कोर्ट ने 22 मई को दिए गए आदेश में सुधार करते 11 जून को यह उल्लेखित किया है कि डॉ. मनीष कुमार उपाध्याय को दी गई सजा निलंबित रहेगी और दोषसिद्धि के आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन भी वर्तमान अपील लंबित रहने तक स्थगित रहेगा।'

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विशेष अदालत ने दोषी माना

वाराणसी की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विशेष अदालत ने भेलुपुर थाने में वर्ष 1995 में दर्ज मुकदमे में 16 जुलाई 2019 को महेंद्र उपाध्याय और डॉ. मनीष कुमार अन्य को धारा 307/34 आइपीसी में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने 10 साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न देने पर चार महीने अतिरिक्त कैद का आदेश था।

सजा के खिलाफ आपराधिक अपील दाखिल की

डॉ. मनीष कुमार उपाध्याय ने सजा के खिलाफ आपराधिक अपील दाखिल की इस पर नौ जनवरी 2020 को हाई कोर्ट की समन्वय पीठ ने उन्हें जमानत दे दी थी। सजा निलंबित करने के लिए डॉ. उपाध्याय के अधिवक्ता आलोक रंजन मिश्रा और अमृता राय मिश्रा ने कहा कि अपीलकर्ता निर्दोष है और झूठा फंसाया गया है।

अपर शासकीय अधिवक्ता ने विरोध किया

अधिवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के साथ काम करते हुए उसने प्रमुख राजनीतिक करियर बनाया है। वह आगामी चुनाव लड़ना चाहता है, लेकिन सजा निलंबन की अर्जी लंबित होने से चुनाव नहीं लड़ पा रहा है। जमानत पर रहते हुए उसने कभी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। इस केस के अलावा उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता ने सजा निलंबन का विरोध किया।

कोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि अपीलार्थी पहले से जमानत पर है और उसने कभी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है। मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना कोर्ट ने सजा निलंबन के लिए उचित मामला माना। कहा है कि अपीलार्थी पहले से जिन जमानत मुचलकों पर हैं, उन्हीं शर्तों पर बाहर रहेगा।