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बुर्का तो नहीं हटाऊंगी; भले ही परीक्षा छोड़नी पड़े कुलसुम बानो अपनी जिद पर अड़ी, क्या वे दे पाई NEET परीक्षा?, जानें...

बुर्का तो नहीं हटाऊंगी; भले ही परीक्षा छोड़नी पड़े कुलसुम बानो अपनी जिद पर अड़ी, क्या वे दे पाई NEET परीक्षा?, जानें...

मेरे लिए बुर्का ज्यादा जरूरी है, एग्जाम नहीं; यह कहकर कुलसुम बानो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। पेपर लीक के आरोपों की वजह से दोबारा कराई गई नीट परीक्षा में सिक्यॉरिटी जांच के दौरान रोकी गई राजस्थान की एक स्टूडेंट कुलसुम बानो को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है। बुर्के के लिए परीक्षा छोड़ने को तैयार हो गई कुलसुम का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कुछ इसे धार्मिक कट्टरता से जोड़कर आलोचना भी कर रहे हैं।

राजस्थान के ब्यावर की रहने वाली कुलसुम बानो नीट स्टूडेंट है। वह अपने पिता के साथ अजमेर में एक परीक्षा केंद्र पर जब पहुंची तो उसका आरोप था कि बुर्के की वजह से उसे अंदर जाने से रोक दिया गया। परेशान और आक्रोशित कुलसुम बानो ने मीडिया से बातचीत में अपना गुस्सा जाहिर किया और सवाल खड़े किए कि कैसे एनटीए के नियम के खिलाफ जाकर उसे रोका जा सकता है? कुलसुम ने दावा किया कि वह पहले की परीक्षा में भी शामिल हुई थीं।

कुलसुम ने कहा, 'मैं नीट परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई हूं। जब मैंने 3 मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैं इसी तरह के कपड़े पहनकर आई थी-बुर्का और दुपट्टा। पहले उन्होंने कहा कि प्रवेश के लिए मुझे दुपट्टा हटाना होगा; फिर उन्होंने यह भी कहा कि मुझे बुर्का भी हटाना पड़ेगा।' बानो ने कहा, 'अगर एनटीए ने हमें अनुमति दी है, तो ये लोग हमें नहीं रोक सकते... अगर मुझे परीक्षा देनी है और वे मुझे इस पोशाक में अंदर नहीं जाने देते, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी।' अपनी जिद पर अड़ी कुलसुम ने दो टूक कहा, 'मेरे लिए परीक्षा मायने नहीं रखती; मेरे लिए मेरा 'बुर्का' और मेरी पहचान मायने रखती है।'

जिद पर अड़ी कुलसुम को मिली अनुमति

काफी देर तक कुलसुम और गेट पर हर एक परीक्षार्थी की बारीकी से जांच कर रहीं महिला सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस होती रही। काफी बाद-विवाद के बाद कुलसुम को एंट्री मिल गई। एनटीए ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी।

सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

कुलसुम भले ही परीक्षा देकर अपने घर चल गई पर सोशल मीडिया पर नई बहस की शुरुआत हो गई। 'परीक्षा से ज्यादा बुर्का जरूरी' वाली बात पर लोग खूब वाद-विवाद कर रहे हैं। कई लोग कुलसुम की बात को जायज तो कुछ इसे कट्टरता बताने में जुटे हैं। मोहम्मद सलीम नाम के एक यूजर ने लिखा, 'एक मुसलमान औरत के लिए उसकी हया ही उसकी सच्ची दौलत होती है। कुलसुम बानो की हिम्मत को सलाम करता हूं।' हाजी निजामुद्दीन अब्बासी ने कहा, 'कुलसुम बानो की जीत सिर्फ एक छात्रा की जीत नहीं, बल्कि अपने हक, पहचान और आत्मसम्मान के लिए डटकर खड़े होने की जीत है। बहुत-बहुत मुबारकबाद।'

नरगिस बानो नाम के एक फैन पेज से लिखा गया, 'कुलसुम बानो तुम्हारी हिम्मत को सलाम , तुम्हारे अब्बू को सलाम।' बुर्का एक लिबास है, जिसे मुस्लिम महिलाओं द्वारा खुद की रक्षा, खुद को गलत नजरों से बचाने के लिए पहना जाता है, ताकि शरीर का बॉडी शेप नजर ना आए। आज पूरे हिंदुस्तान में कुलसुम की चर्चा है, कुलसुम बानो राजस्थान के ब्यावर की रहने वाली है जिसने बहादुरी से अपने हक की आवाज बुलंद की।'

आलोचना करने वाले क्या बोल रहे

वहीं, ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो कुलसुम की आलोचना कर रहे हैं। शिवा नाम के एक यूजर ने कहा, 'कुलसुम बानो NEET परीक्षा केंद्र पर हिजाब हटाने के लिए कहा गया। उसने इनकार कर दिया उसने कहा- परीक्षा मेरे लिए मायने नहीं रखती; मेरे लिए मायने रखता है मेरा बुर्का मेरी पहचान...। डॉक्टर, सर्जन, या विशेषज्ञ जैसे जिम्मेदार पदों पर बुर्का पहनने वाली खातून होना भी नहीं चाहिए.!' सतीश नाम के एक यूजर ने कहा, 'कुलसुम बानो ने कहा 'मेरे लिए परीक्षा से ज्यादा मेरी पहचान और मेरा बुर्का मायने रखता है। इससे इसकी कट्टरता का अंदाजा लगा लीजिए।'