यूपी में सड़क, विकास, PDA की बात करते-करते 'हिंदुत्व' पर कैसे शिफ्ट हुई सपा?, पढ़ें पूरी लेख...
लखनऊ राज्य, ब्यूरो। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हिंदुओं और ब्राह्मणों के अपमान को लेकर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार में ब्राह्मणों का अपमान किया जा रहा है, संतों पर हमला बोला जा रहा है, समाजवादी पार्टी, इनका सम्मान करती है। अखिलेश यादव ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
पुराने समाजवादियों के लिए अखिलेश यादव का यह रुख चौंकाने वाला है। मुलायम सिंह यादव से लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी तक, अगड़ी जातियों के खिलाफ खूब बोलते रहे हैं। अब अखिलेश यादव, परंपरा से उलट, नई राजनीति की कवायद कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी, अपने मूल विचारधारा से भटक गई है।
अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
जो संतों तक की सगी नहीं, वह बीजेपी अब और नहीं। हमारे महाकाव्यों की यही सीख है कि जो संत-यज्ञ में और सद्-कर्म में बाधा बनते हैं, उनका अंत प्रभु स्वयं करते हैं।
मूल से भटक गई है समाजवादी पार्टी?
समाजवादी पार्टी, डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित है। उन्होंने सप्त क्रांति का सिद्धांत दिया था, जिसे पार्टी, एक अरसे से इसे मानती है। लोहिया मानते थे कि स्त्री-पुरुष में भेद नहीं होना चाहिए, नस्लभेद खत्म होना चाहिए, जाति प्रथा का अंत हो, साम्राज्य और गुलामी की दासता से लोग मुक्त हों, आर्थिक समानता, निजी जीवन में सरकारी हस्तक्षेप न हो, अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते पर लोग बढ़ें।
लोहिया के सिद्धांतों में जाति प्रथा और धार्मिकता के लिए जगह नहीं थी। अखिलेश यादव की सियासत में सॉफ्ट हिंदुत्व की एंट्री हो गई है, वह ब्राह्मणों के हितों की बात कर रहे हैं, वह चाहते हैं कि सरकार परशुराम जयंती पर राज्य में अवकाश घोषित करे। वह बीजेपी पर साधु-सतों के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। जिन-जिन मुद्दों पर वह योगी सरकार को घेरते रहे हैं, उन्हीं मुद्दों की सियासत वे खुद कर रहे हैं।
कैसे हिंदुत्व पर शिफ्ट हुए हैं अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव ने इटावा में 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' का निर्माण कराया है। यह मंदिर इटावा सफारी पार्क के सामने करीब 50 बीघा में फैला है। वह बद्रीनाथ धाम का दौरा भी कर चुके हैं। वह मंदिरों में जाते हैं, त्रिपुंड भी लगा लेते हैं। पहले अखिलेश यादव, खुद को सच्चा सनातनी भी बताते हैं और योगी सरकार को घेरते हैं।
अखिलेश यादव अब अपनी छवि सुधारने की कवायद में जुटे हैं। पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) की राजनीति पर जोर देने वाले अखिलेश यादव की सियासत में अब एक वर्ग ब्राह्मण भी है। वह ब्राह्मणों के अपमान के मुद्दे पर योगी को लगातार घेर रहे हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अखिलेश यादव के पक्ष में लगातार कई ऐसे बयान दिए,जिसके बाद से ही वह उत्साहित हैं।
कहां से अखिलेश यादव ने सीखा दांव?
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी में राम मंदिर का उद्घाटन किया, लोगों ने इसे चुनाव से जोड़कर देखा। तभी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह मंदिर, अपूर्ण है इसलिए इसका उद्धाघटन नहीं हो सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होगी तो पहले से विराजमान रामलला की मूर्तियों का क्या होगा? पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर सहमति नहीं जताई थी।
समाजवादी पार्टी ने इसे सियासी मुद्दा बनाया। अप्रैल-जून में लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को तगड़ा झटका लगा। राम मंदिर वाले मुद्दे के बाद भी बीजेपी को कोई सियासी लाभ नहीं मिला। बीजेपी के पास यूपी में 2019 में 62 सीटें थीं, 2024 के चुनाव में सिर्फ 33 सीटें बचीं। अखिलेश यादव को लगा कि अब इसे मुद्दा बनाया जा सकता है।
क्यों बदल रहे हैं अखिलेश यादव अपने तेवर?
साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। समाजवादी पार्टी ने 2024 के चुनाव में 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' वोटरों को साधने के लिए 'PDA' का फॉर्मूला दिया था। यह फॉर्मूला कामयाब भी हुआ था। बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपना जनाधार लगातार खो रही है।
2019 में 10 सीटों वाली बहुजन समाज पार्टी का 2024 के चुनाव में खाता तक नहीं खुल पाया था। अखिलेश यादव अब हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़कर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
यूपी में ओबीसी वर्ग की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है। मुस्लिम आबादी 19 फीसदी से ज्यादा है। दलित वोटर 20 फीसदी और ब्राह्मण वर्ग 12 फीसदी है। अखिलेश यादव अगर इन्हें साधने में सफल हुए तो बीजेपी की राह और मुश्किल हो सकती है।
प्रस्तुति :: सहायक संपादक !! (तुषार कुमार)।