Who is Robin Khudaबांग्लादेश के इस शख्स की कंपनी भारत में लगाने वाली है झोंकमझोंक पैसा, रॉबिन खुदा ये है कौन? जानिए...
ऑस्ट्रेलिया/नईदिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की कंपनी एयरट्रंक (AirTrunk) ने भारत में 3 लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) का निवेश करने की योजना का ऐलान किया। कंपनी के फाउंडर और सीईओ रॉबिन खुदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद इसका ऐलान हुआ।
रॉबिन खुदा कौन हैं? जानें
रॉबिन खुदा एयरट्रंक के फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) हैं। वह अपनी अरबपति हैसियत और 'खुदा फैमिली फाउंडेशन' के जरिए किए जाने वाले समाज-सेवा के कामों के लिए भी जाने जाते हैं।
* ढाका में जन्मे और पले-बढ़े रॉबिन खुदा के पिता का नाम एसएम वाजेद अली है।
* उन्होंने शेर-ए-बांग्ला नगर गवर्नमेंट बॉयज हाई स्कूल और हरमन गेमीनर कॉलेज से पढ़ाई की।
* 1997 में HSC की परीक्षा पास करने के बाद रॉबिन खुदा ऑस्ट्रेलिया चले गए।
* अकाउंटिंग की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी में दाखिला लिया।
* अगले साल उनके माता-पिता भी वहां चले गए। उनके पिता ने बाद में ऑस्ट्रेलिया में काम किया।
मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से एमबीए
'प्रोथोम आलो' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खुदा ने 2002 में अपनी अंडरग्रेजुएट पढ़ाई पूरी की। ब्रिटेन के मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। पढ़ाई के साथ उन्होंने कई तरह की नौकरियां कीं। बाद में सर्टिफाइड प्रैक्टिसिंग अकाउंटेंट बने।
इस तरह आगे बढ़ा करियर
2007 में रॉबिन खुदा जनरल मैनेजर के तौर पर फिजुत्सु (Fujitsu) से जुड़े। वहां उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टेलीकम्युनिकेशन और क्लाउड कंप्यूटिंग का काम संभाला। इसके बाद वह PIPE नेटवर्क्स में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) बने। यह कंपनी ऑस्ट्रेलिया और गुआम के बीच सबमरीन फाइबर-ऑप्टिक केबल बिछाने के काम में शामिल थी। बाद में उन्होंने डेटा सेंटर कंपनी NEXTDC में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर काम किया। वह इसके फाउंडिंग मेंबर भी थे। कंपनी का मार्केट वैल्यू बढ़कर लगभग A$10 अरब हो गया।
उन्होंने एशिया-पैसिफिक में कई मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियों में लीडरशिप की भूमिकाएं निभाईं।
2014 में उन्होंने टेलीकम्युनिकेशन पेमेंट कंपनी 'मिंट वायरलेस' (Mint Wireless) का सीईओ बनने के लिए NEXTDC छोड़ दिया।
2015 में शुरू हुई एयरट्रंक
बांग्लादेशी न्यूज साइट के अनुसार, रॉबिन खुदा ने बताया कि 2010 या 2011 के आसपास उन्होंने क्लाउड सर्विसेज की बढ़ती लोकप्रियता देखी। डेटा सेंटर सेक्टर में मौके पहचाने। इसी के चलते 'एयरट्रंक' की शुरुआत हुई। इसका मकसद बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को सपोर्ट करने के लिए किफायती और एनर्जी-एफिशिएंट क्लाउड स्टोरेज सुविधाएं बनाना था।
एयरट्रंक ने 2015 में काम शुरू किया। जल्द ही 40 करोड़ डॉलर का डेटा सेंटर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया। कंपनी को फंडिंग की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रॉबिन खुदा ने इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट की तलाश करते हुए अपनी ज्यादातर पर्सनल सेविंग्स इसमें लगा दीं। 2017 की शुरुआत तक एयरट्रंक ने जरूरी फंडिंग हासिल कर ली।
एयरट्रंक अब ऑस्ट्रेलिया में डेटा मैनेजमेंट और स्टोरेज के क्षेत्र में एक बड़ी कंपनी है। इसके ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, जापान, मलेशिया और सिंगापुर में 11 डेटा सेंटर हैं। 40 और सेंटर बनाने की योजना है।
ऑस्ट्रेलिया के 109वें सबसे अमीर
2024 के आखिर में ब्लैकस्टोन के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम (जिसमें CPP इन्वेस्टमेंट्स भी शामिल था) ने एयरट्रंक का अधिग्रहण कर लिया। इस दौरान रॉबिन खुदा सीईओ बने रहे। कंपनी में अपनी हिस्सेदारी भी बनाए रखी। कंपनी की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर बताई गई थी। रॉबिन खुदा ऑस्ट्रेलिया के 109वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
पीएम मोदी ने दी यह जानकारी
पीएम मोदी ने बताया कि एयरट्रंक का निवेश देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में सबसे बड़े प्रस्तावित निवेशों में से एक है। इससे देश में 5 GW की डेटा सेंटर क्षमता विकसित होगी।
पीएम मोदी ने कहा कि इस तरह के निवेश से क्लाउड कंप्यूटिंग और AI के ग्लोबल हब के तौर पर भारत की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लोकल सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलेगा। इनोवेशन-आधारित विकास में तेजी आएगी।
रॉबिन खुदा ने बताया मैसेज
रॉबिन खुदा ने कहा कि एयरट्रंक को यह साफ संदेश मिला कि भारत निवेश के लिए खुला है। वह अगली पीढ़ी के AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मुकाबला करने को तैयार हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत के उद्योगों और अर्थव्यवस्था को बदल देगा। पीएम मोदी के अलावा, रॉबिन खुदा ने महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के मंत्रियों से भी मुलाकात की।