वाराणसी में 11 घंटे चला बुलडोजर, दालमंडी की 5 मस्जिदों के 60% हिस्से गिरे, दायरे में लंगड़े हाफिज मस्जिद, गुरुवार तोड़फोड़ आगे जारी...
वाराणसी, दालमंडी न्यूज। वाराणसी के दालमंडी इलाके में बुधवार सुबह प्रशासन ने चौड़ीकरण परियोजना के तहत मस्जिदों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। सुबह 7:30 बजे से शुरू हुई यह प्रक्रिया करीब 11 घंटे चली। इस दौरान पांच मस्जिदों के 50 से 60 प्रतिशत हिस्से को गिरा दिया गया। शाम को अंधेरा होने पर काम रोक दिया गया, जिसे गुरुवार सुबह फिर से शुरू किया जाएगा।
मीनारें और ढांचा गिराया गया
दिनभर करीब 200 मजदूर हथौड़ों से मस्जिदों को तोड़ने में लगे रहे. एक मस्जिद की लगभग 20 फीट ऊंची दो मीनारें भी गिरा दी गईं. प्रशासन ने दालमंडी जाने वाले रास्ते को टीन शेड लगाकर बंद कर दिया ताकि आम लोगों की आवाजाही न हो सके।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए 1860 जवान तैनात किए गए. इनमें पीएसी की सात कंपनियां, सीआरपीएफ की एक बटालियन, आरआरएफ की एक बटालियन और स्थानीय पुलिस बल शामिल रहा. मीडिया को वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करने से भी रोक दिया गया।
परियोजना में छह मस्जिदें शामिल
दालमंडी चौड़ीकरण योजना के तहत कुल छह मस्जिदें प्रभावित हो रही हैं. इनमें से पांच मस्जिदों के प्रबंधन ने पहले ही ध्वस्तीकरण के लिए सहमति दे दी थी. एक मस्जिद को लेकर सहमति नहीं बन सकी. मुहर्रम खत्म होने के बाद बुधवार को इन पांच मस्जिदों के चिह्नित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई।
मकानों पर भी कार्रवाई
इस परियोजना में 181 मकानों को भी हटाया जाना है. अब तक 162 मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिनमें से 80 मकान पूरी तरह गिराए जा चुके हैं. बुधवार को सबसे पहले मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग की बाउंड्री तोड़ने का काम शुरू हुआ।
मजदूर और पुलिस की तैनाती
ध्वस्तीकरण में 200 मजदूर लगाए गए और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। आम लोगों को कार्रवाई स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।
लंगड़े हाफिज मस्जिद का महत्व
नई सड़क के कपड़ा बाजार में स्थित लंगड़े हाफिज मस्जिद में चांद कमेटी का दफ्तर भी है। इस मस्जिद की देखरेख अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी करती है, जो ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन भी करती है। कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने बताया कि यह मस्जिद आजादी से पहले की है और यहां जुमे, ईद और बकरीद की नमाज सबसे आखिर में अदा की जाती है। एक समय में यहां 5 से साढ़े 5 हजार लोग नमाज पढ़ते हैं।