13 हजार के जूते 1 महीने में हुए खराब. कोर्ट ने कंपनी पर ठोका जुर्माना,उपभोक्ता फोरम के द्वारा ग्राहक को रिफंड के साथ मिलेंगे इतने रुपये...
Shoes Company Fined: अगर आप भी महंगे और नामी ब्रांड्स के जूते यह सोचकर खरीदते हैं कि वे लंबे समय तक चलेंगे, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चंडीगढ़ के एक उपभोक्ता फोरम ने खेल सामग्री बनाने वाली मशहूर कंपनी ‘एसिक्स इंडिया’ को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का दोषी पाया है। चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायत कर्ता को खराब रनिंग शूज़ की पूरी कीमत 6,499 रुपये रिफंड करे। इसके साथ ही खरीद की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मानसिक उत्पीड़न व मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 10,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देने का हुक्म सुनाया है। यह सारा भुगतान कंपनी को 60 दिनों के भीतर करना होगा।
यह मामला पंचकुला के रहने वाले अजय मलिक से जुड़ा हुआ है। अजय मलिक ने 30 अगस्त 2020 को चंडीगढ़ के मशहूर एलांते मॉल (Elante Mall) स्थित एसिक्स स्टोर से कुछ सामान खरीदा था, जिसमें एक जोड़ी रनिंग शूज भी शामिल थे। इन जूतों की असल कीमत 12,999 रुपये थी, लेकिन 50 प्रतिशत के बंपर डिस्काउंट के बाद इन्हें 6,499 रुपये में बेचा गया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जूते खरीदने के महज एक महीने के भीतर ही उन्हें दौड़ते और टहलते समय टखनों में असहजता महसूस होने लगी। जब उन्होंने जूतों की जांच की, तो पता चला कि जूतों का सोल एड़ी और अन्य किनारों से पूरी तरह अलग हो गया था और उसकी पेस्टिंग/जेल निकल चुकी थी।
अजय मलिक ने आयोग को बताया कि वह नियमित रूप से पंचकुला-चंडीगढ़ रोड पर टहलते और जॉगिंग करते हैं। जूतों के इस डिफेक्ट (खराबी) के कारण उनके साथ कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती थी और उन्हें बड़ी चोट लग सकती थी। इसके बाद वे जूते लेकर वापस स्टोर गए, जहां स्टोर कर्मियों ने उनका क्लेम मंजूर कर लिया। चूंकि वह मॉडल उपलब्ध नहीं था, इसलिए उन्हें 6,500 रुपये की कीमत के दूसरे जूते चुनने को कहा गया और उनसे एक एक्सचेंज फॉर्म पर साइन भी कराए गए।
वाउचर का खेल और कंपनी की दलील
अजय मलिक का आरोप है कि बाद में कंपनी ने जूते बदलने से साफ मना कर दिया। इसकी जगह कंपनी उन्हें केवल एक ‘क्रेडिट वाउचर’ लेने के लिए मजबूर करने लगी, जिसे मलिक ने बार-बार खारिज कर दिया। वे लगातार या तो नया जूता देने या फिर अपने पैसे वापस करने की मांग कर रहे थे।
दूसरी तरफ, एसिक्स इंडिया ने अदालत में अपना बचाव करते हुए माना कि मलिक स्टोर पर शिकायत लेकर आए थे, लेकिन कंपनी ने किसी भी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माण दोष) से इनकार किया। कंपनी का दावा था कि उनकी तकनीकी जांच में कोई खराबी नहीं पाई गई और उन्होंने केवल अच्छे व्यवहार (Goodwill Gesture) के तौर पर जूते बदलने की पेशकश की थी। कंपनी ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी मलिक पर क्रेडिट वाउचर स्वीकार करने का दबाव नहीं बनाया।
उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को क्यों फटकारा?
आयोग के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह सिद्धू और सदस्य बी एम शर्मा की पीठ ने एसिक्स इंडिया के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया:
अगर खराबी नहीं थी, तो क्लेम क्यों माना?: आयोग ने कहा, “अगर जूतों में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था, तो कंपनी ने पहली बार में शिकायतकर्ता का क्लेम क्यों मंजूर किया और एक्सचेंज फॉर्म पर साइन क्यों कराए?”
सबूत पेश करने में नाकाम रही कंपनी:
कोर्ट ने नोट किया कि एसिक्स ने अपने दावों के समर्थन में कोई भी तकनीकी रिपोर्ट, विशेषज्ञ की राय या लैब एनालिसिस रिपोर्ट पेश नहीं की, जिससे साबित हो सके कि जूते सही थे।
महंगे ब्रांड्स से टिकाऊपन की उम्मीद:
आयोग ने कहा कि जब कोई ग्राहक किसी बड़े ब्रांड के जूतों के लिए मोटी रकम चुकाता है, तो उसे यह उम्मीद करने का पूरा कानूनी अधिकार है कि वह प्रोडक्ट टिकाऊ और इस्तेमाल के लायक होगा। महज एक महीने में जूतों का खराब होना यह साबित करता है कि वे घटिया स्तर के थे।
अदालत का अंतिम फैसला
चूंकि इस घटना को लंबा समय बीत चुका है और वर्तमान में उस पुराने मॉडल के जूतों का स्टॉक मिलना मुश्किल है, इसलिए आयोग ने रिप्लेसमेंट (बदलने) के बजाय रिफंड का आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि एसिक्स इंडिया शिकायतकर्ता को जूतों की पूरी कीमत 6,499 रुपये (6% सालाना ब्याज के साथ) वापस करे। मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के मुआवजे के रूप में 10,000 का भुगतान करे। यह सभी आदेश सर्टिफाइड कॉपी मिलने के 60 दिनों के भीतर पूरे किए जाएं।