13, 16 और 20 जुलाई को झाझा-बर्द्धमान रूट पर सफर करने वाले मुसाफिर ध्यान दें, रेलवे ने फिर बदला नियम, जानकार ही घर से निकले...
सिमुलतला (जमुई), न्यूज। भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन इन दिनों झाझा-सीतारामपुर रेलखंड पर सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए यही लाइफलाइन मानसिक प्रताड़ना की वजह बन गई है। रेलवे प्रशासन के रोज़ बदलते फैसलों, फाइलों में बंद होती-खुलती ट्रेनों और पल-पल बदलते फरमानों ने आम जनता को पूरी तरह हलाकान और बेबस करके रख दिया है। स्थिति यह है कि घर से निकलते वक्त यात्री केवल भगवान भरोसे होता है, क्योंकि उसे खुद नहीं पता कि जिस ट्रेन का टिकट उसकी जेब में है, वह पटरियों पर दौड़ेगी भी या नहीं।
मथुरापुर स्टेशन पर ट्रैक मरम्मत के नाम पर बड़ा यू-टर्न
मथुरापुर स्टेशन पर ट्रैक मरम्मत के नाम पर पिछले 48 घंटों में रेलवे ने जिस तरह अपने ही फैसलों को बदला है, उसने रेल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवश्यक कार्य से जाने वाले यात्री हों, अस्पताल पहुंचने की जद्दोजहद में लगा कोई लाचार मरीज हो, या परीक्षा देने की आस में बैठा कोई छात्र-रेलवे के इस खेल ने हर किसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब एक आम इंसान अपने सफर की योजना बनाता है, तो वह केवल टिकट नहीं खरीदता, बल्कि अपनी जिम्मेदारियां तय करता है, लेकिन रेलवे ने इन भावनाओं को महज़ कागजी पन्ना समझ लिया है।
पहले पूरी तरह किया रद्द, फिर बहाल और अब बीच रास्ते में रोकेंगे
इस लापरवाही का पूरा घटनाक्रम बीते 7 जुलाई की शाम से शुरू हुआ, जब रेलवे ने अचानक एक आदेश जारी कर 9 जुलाई से 13 अगस्त के बीच बर्द्धमान-झाझा मेमू ट्रेन (63509/10) को बंद कर दिया। इस फरमान से दैनिक मुसाफिरों का बजट और शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया, जिसके बाद 8 जुलाई को रेलवे ने अपनी गलती सुधारने का दिखावा करते हुए नया फरमान जारी कर ट्रेन बहाल कर दी। मुसाफिरों ने अभी राहत की सांस ली ही थी कि शुक्रवार की शाम रेलवे ने एक बार फिर नया पेंच फंसा दिया; अब यह ट्रेन न तो पूरी रद्द है और न ही बहाल, बल्कि इसे आंशिक रूप से चलाया जाएगा।
13, 16 और 20 जुलाई को लगेगा मेगा ब्लॉक, टूट जाएगा आधा सफर
रेलवे के इस ताजा आदेश के मुताबिक, आगामी 13, 16 और 20 जुलाई 2026 को दोपहर 02:00 बजे से शाम 05:30 बजे तक भारी ब्लॉक रहेगा, जो यात्रियों के सफर को बीच रास्ते में ही तोड़ देगा। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन संख्या 63509 बर्द्धमान-झाझा मेमू बर्द्धमान से खुलकर केवल मधुपुर स्टेशन तक ही जाएगी, जिससे झाझा जाने वाले यात्री अब बीच रास्ते में उतरकर चिलचिलाती धूप में भटकने को मजबूर होंगे। वहीं दूसरी तरफ, ट्रेन संख्या 63510 झाझा-बर्द्धमान मेमू झाझा के बजाय सीधे मधुपुर स्टेशन से खुलेगी, जिसके कारण झाझा से मधुपुर के बीच आने वाले छोटे स्टेशनों के यात्रियों से उनकी ट्रेन ही छीन ली गई है।
रोज कमाने-खाने वाले मुसाफिरों के जख्मों पर छिड़का नमक
आधा सफर और दोगुनी आफत के इस नए नियम से बेबस होकर झाझा के एक दैनिक यात्री वसंत कुमार का दर्द फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि हम गरीब लोग रोज़ कमाने-खाने वाले लोग हैं। छोटे निजी वाहनों का किराया ट्रेन से तीन गुना ज्यादा है जिसे हम रोज़ वहन नहीं कर सकते, रेलवे बिना सोचे-समझे ट्रेन रद्द कर बाद में 'एक छोटा सा खेद है' लिखकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। मरम्मत कार्य जरूरी है, लेकिन इसके लिए इतनी लापरवाही से योजना क्यों बनाई जाती है कि रोज़ नियम बदलने पड़ें? रेलवे का यह खेद प्रकट करना अब आम यात्रियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।बिना स्टेटस चेक किए घर से न निकलें
सफर की इस घोर अनिश्चितता के बीच,आगामी 13, 16 और 20 जुलाई को बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तो इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें। यदि घर से निकलना बेहद अनिवार्य हो, तो स्टेशन छोड़ने से पहले रेलवे काउंटर या आधिकारिक डिजिटल माध्यमों से ट्रेन की वास्तविक और लाइव स्थिति का पता जरूर लगा लें। ऐसा करने से आप किसी भी अप्रिय स्थिति, बीच रास्ते में फंसने या भारी वित्तीय नुकसान से खुद को सुरक्षित रख सकेंगे और आपका सफर अनावश्यक परेशानियों से पूरी तरह बच जाएगा।