दस तस्करों पर लगा गैंगस्टर एक्ट, लोकेश नया गैंग लीडर; प्रयागराज-गोरखपुर और कानपुर के कई बदमाश गिरोह के सदस्य...
वाराणसी, न्यूज। दो हजार करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में सारनाथ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तस्करी के 10 आरोपितों को गैंग्सटर एक्ट में निरुद्ध किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि वाराणसी का लोकेश अग्रवाल अब गैंग का लीडर है। उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं।
गिरोह के 10 सदस्यों में प्रयागराज, गोरखपुर और कानपुर के कई बदमाश शामिल हैं जो जेब भरने के लिए कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी में संलिप्त रहे। गिरोह में शामिल कानपुर के कारोबारी विनोद अग्रवाल की लगभग पांच करोड़ की संपत्ति पुलिस ने कफ सीरप से जुड़े एक अन्य मामले में पहले ही जब्त कर चुकी है, जबकि शेष के खिलाफ गैंग्सटर एक्ट लगने के बाद कार्रवाई शुरू होगी।
वाराणसी से हैं गिरोह के दो सदस्य
गिरोह के दो सदस्य वाराणसी के शुभम जायसवाल (दुबई में छिपे) व उसके पिता भोला प्रसाद (सोनभद्र जेल में बंद) पहले से गैंग्सटर एक्ट में निरुद्ध हैं। औषधि निरीक्षक जुनाब अली ने बीते 18 जून को मेसर्स पीडी फार्मा के मालिक विष्णु कुमार पांडेय के खिलाफ कफ सीरप तस्करी का केस दर्ज कराया था।
वाराणसी कमिश्नरेट सारनाथ पुलिस ने जांच शुरू की और पुख्ता सुबूत मिलने पर लोकेश अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। पीडी फार्मा के मालिक और मुकदमे के मुख्य आरोपित विष्णु पांडेय से पूछताछ की गई तो उसने लोकेश को सरगना बताया था।
वहीं जांच में ऐसे साक्ष्य मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि सरगना लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में विष्णु पांडेय, प्रतीक गुजराती, प्रयागराज का सुरेशचंद्र गुप्ता व फैजुर्रहमान, कानपुर का विनोद अग्रवाल, प्रयागराज का सत्येन्द्र कुमार साहू व शाहगंज का मोहम्मद सैफ, वाराणसी का आकाश पाठक और गोरखपुर का मनीष कुमार सिंह गिरोह बनाकर कोडीनयुक्त कफ सीरप का तस्करी कर रहे थे।
सारनाथ थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि सभी आरोपित फिलहाल जेल में हैं। अब गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद गिरोह के एक-एक सदस्य की संपत्ति जब्त की जाएगी।