Headlines
Loading...
आज मोदी कैबिनेट ने काशी को दी बड़ी सौगात.. पीएम के संसदीय क्षेत्र को दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मिली मंजूरी...

आज मोदी कैबिनेट ने काशी को दी बड़ी सौगात.. पीएम के संसदीय क्षेत्र को दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मिली मंजूरी...

नईदिल्ली/वाराणसी, न्यूज। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र को बड़ी सौगात दी है। वाराणसी में सुगम यातायात को लेकर बेहद प्रयत्नशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की बैठक में वाराणसी को दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिली है। यह कॉरिडोर वाराणसी में भीड़ कम करने की योजना का एक अहम हिस्सा है। यह NH-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

वाराणसी शहर में भीड़ कम करने के लिए वरुणा नदी के किनारे NH-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे लिंक के विकास को मंजूरी दी गई है। वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे चार और छह लेन का कॉरिडोर बनाया जाएगा। प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 46 किलोमीटर होगी।

परियोजना से शहर का यातायात सुगम होने और जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट में मुख्य कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड सहित मुख्य रूप से 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। इसे NHAI हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत कुल 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करेगा।

इसके साथ ही वाराणसी रिंग रोड, वाराणसी एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के घाटों और आसपास के चंदौली क्षेत्र तक पहुंच को काफी बेहतर बनाएगा।

14447.64 करोड़ रुपये की लागत वाला प्रोजेक्ट

मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर 14447.64 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से छह लेन वाले ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर, रैंप/लूप और फुट ओवर ब्रिज के विकास को एनएच(ओ) के तहत मंजूरी दी। जिसमें 6,037.85 करोड़ रुपए की सिविल निर्माण लागत (यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित, जीएसटी को छोड़कर) और एनएच(ओ) के तहत 541.11 करोड़ रुपए की भूमि अधिग्रहण लागत शामिल है। इससे वाराणसी में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच गंगा नदी के तट पर कनेक्टिविटी मिलेगी। 46.039 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में छह लेन का एलिवेटेड मेन कैरिजवे, एक प्रतिष्ठित केबल-स्टे ब्रिज, एक एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल हैं।

सड़क नेटवर्क पर काफी कम होगी भीड़

यह परियोजना एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी, जिससे शहर के सड़क नेटवर्क पर भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी और शहरी आवागमन में सुधार होगा। 80-100 किमी/ प्रतिघंटा की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन की गई इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में औसत यात्रा समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट होने की उम्मीद है, जो लगभग 67 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। एनएच-19 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा समय 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा, जिससे लगभग 25 मिनट की बचत होगी।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह कॉरिडोर प्रमुख राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों, लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे और रामनगर आईवाई बंदरगाह तक निर्बाध पहुंच प्रदान करके बहुआयामी कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों सहित प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक कनेक्टिविटी में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़कर, यह परियोजना लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करेगी, सड़क सुरक्षा बढ़ाएगी, पर्यटन और तीर्थयात्रा को सुगम बनाएगी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सतत क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क

इस कॉरिडोर को वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से एक शहरी परिवहन परियोजना के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसका लक्ष्य एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड (एनएच-135बी), रामनगर/बीएचयू और अन्य महत्वपूर्ण शहरी स्थानों के बीच एक उच्च गति, नियंत्रित संपर्क उपलब्ध कराना है। प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ से अधिक पर्यटक और तीर्थयात्री वाराणसी आते हैं। ऐसे में यह परियोजना काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला, वाराणसी के घाट और काशी रेलवे स्टेशन सहित प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार करेगी। साथ ही मौजूदा शहरी सड़क नेटवर्क पर भीड़भाड़ को काफी हद तक कम करेगी। बीएचयू/लंका और सामने घाट के बीच एक एलिवेटेड स्पूर, व्यस्त लंका जंक्शन पर यातायात की भीड़ को और कम करेगा।

सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाएगी यह परियोजना

यह परियोजना सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाएगी। यातायात को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करेगी। जिससे वाहनों की परिचालन लागत और उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा यात्रा की विश्वसनीयता को बढ़ाते हुए यात्री परिवहन और माल ढुलाई को अधिक सुगम बनाएगी। इसके साथ ही घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों से ट्रैफिक को डायवर्ट करके एनएच-19, बीएचयू-रामनगर कॉरिडोर और एनएच-35 पर भीड़ कम करेगी।

महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग विशेषताएं शामिल

इस परियोजना में कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग विशेषताएं शामिल हैं। जिनमें गंगा नदी पर बना 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज, काशी विश्वनाथ मंदिर तक सुगम पैदल यात्री संपर्क प्रदान करने वाले ट्रैवललेटरों से सुसज्जित 1.32 किलोमीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, मौजूदा/प्रस्तावित मालवीय ब्रिज पर बना रेल ओवर ब्रिज, आपातकालीन पार्किंग स्थल, ध्वनि अवरोधक, संरचना के बाहरी हिस्से को रोशन करने के लिए विशेष लाइटिंग और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित स्थापत्य तत्व शामिल हैं। ये सभी विशेषताएं न केवल परिवहन की दक्षता में सुधार लाएंगी, बल्कि शहरी सौंदर्य को भी निखारेंगी और वाराणसी के क्षितिज पर इसे एक प्रतिष्ठित स्थान पर स्थापित कर देंगी।

मजबूत करेगा बहुआयामी कनेक्टिविटी

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप यह कॉरिडोर एक आर्थिक केंद्र (चंदौली एसईजेड), एक सामाजिक केंद्र (चंदौली आकांक्षी जिला) और छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों- लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर आईवाई बंदरगाह को जोड़कर बहुआयामी कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इन परिवहन केंद्रों और काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों जैसे प्रमुख स्थलों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करके, यह परियोजना बहुआयामी एकीकरण को बढ़ावा देगी, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करेगी, पर्यटन और तीर्थयात्रा को सुगम बनाएगी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में सतत क्षेत्रीय आर्थिक विकास को समर्थन देगी।

तीर्थयात्रा के बुनियादी ढांचे को बढ़ाएगा

यह प्रस्तावित गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर एक आधुनिक, उच्च क्षमता वाला शहरी परिवहन कॉरिडोर बनाएगा जो वाराणसी में आवागमन को बदल देगा। यह कॉरिडोर तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, भीड़भाड़ को काफी हद तक कम करेगा, मल्टीमॉडल एकीकरण को मजबूत करेगा, पर्यटन और तीर्थयात्रा के बुनियादी ढांचे को बढ़ाएगा और प्रधानमंत्री की गति शक्ति और विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप सतत आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।