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वाराणसी : जंतर-मंतर पर जो दिखा उससे पूरे महिला समाज का शर्म से झुका सिर : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल...

वाराणसी : जंतर-मंतर पर जो दिखा उससे पूरे महिला समाज का शर्म से झुका सिर : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल...

वाराणसी, न्यूज। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को कहा कि संस्कारवान और शिक्षित पीढ़ी ही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे अनुशासन, संस्कार और शिक्षा के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति के शाश्वत जीवन-मूल्य सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा, कर्तव्य और वसुधैव कुटुंबकम ही राष्ट्र को आगे बढ़ाने की शक्ति हैं। पिछले दिनों जंतर-मंतर पर जो दृश्य देखने को मिला, उससे पूरे महिला समाज का सिर शर्म से झुक गया। संस्कृति से ही संस्कार आता है।

बेटियों को वेद, उपनिषद, गीता, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर संस्कारवान बनना चाहिए। राज्यपाल संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन स्थित सभागार में आयोजित 44वें दीक्षा समारोह को संबोधित कर रही थीं।

उत्तरदायी नागरिक तैयार करना भी है उद्देश्य

उन्होंने कहा कि पारंपरिक शास्त्रों और भारतीय ज्ञान-परंपरा के अध्ययन में छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि चरित्रवान, विवेकशील और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जा रहा है, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। उन्होंने विश्वविद्यालय में विकास कार्यों, पांडुलिपि संरक्षण तथा अधोसंरचना विस्तार के लिए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में वर्षों से लंबित कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया है।

दो मुस्लिम छात्राओं को स्वर्ण, रूसी छात्र को कांस्य पदक : दीक्षा समारोह में कुल 11,958 विद्यार्थियों की उपाधियां डिजिटल लाकर के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं। 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 17 छात्रों को 35 और 12 छात्राओं को 16 स्वर्ण पदक मिले। सम्मानित विद्यार्थियों में दो मुस्लिम छात्राएं भी शामिल रहीं। आयुर्वेद से आचार्य की छात्रा तमन्ना बानो को दो, जबकि संस्कृत विद्या से आचार्य की छात्रा कायनात खानम को एक स्वर्ण पदक मिला। संस्कृत प्रमाणपत्रीय कोर्स के रूसी छात्र कुचुक अर्तेमी वैसीलीविच ने भी कांस्य पदक प्राप्त किया।

जौनपुर सिटी स्टेशन पर 35 मिनट रुकी राज्यपाल की ट्रेन

दीक्षा समारोह के बाद राज्यपाल बेगमपुरा एक्सप्रेस से लखनऊ के लिए रवाना हुईं। हालांकि वाराणसी-लखनऊ रेलखंड पर बख्शा और सरायहरखू स्टेशनों के बीच एक मालगाड़ी का इंजन खराब होने से लाइन बाधित हो गई थी। इसके चलते दोपहर दो बजे बेगमपुरा एक्सप्रेस को जौनपुर सिटी स्टेशन पर रोकना पड़ा। ट्रेन रुकते ही जीआरपी, आरपीएफ और स्थानी पुलिस ने सुरक्षा घेरा बना लिया।

रेलवे प्रशासन ने दूसरा इंजन लगाकर मालगाड़ी को आगे बढ़ाया, जिसके बाद दोपहर 2.35 बजे बेगमपुरा एक्सप्रेस रवाना हुई। राज्यपाल को कार से बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय जाना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से लखनऊ लौटने का निर्णय लिया।