Headlines
Loading...
वाराणसी में 2 सेमी/घंटे की रफ्तार से बढ़ी गंगा, जलमग्न हुआ रत्नेश्वर महादेव मंदिर, डूबने लगे गंगा के घाट...

वाराणसी में 2 सेमी/घंटे की रफ्तार से बढ़ी गंगा, जलमग्न हुआ रत्नेश्वर महादेव मंदिर, डूबने लगे गंगा के घाट...

वाराणसी, केसरी न्यूज 24। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे घाटों पर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होने लगी है। केंद्रीय जल आयोग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, गंगा का जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। फिलहाल नदी का जलस्तर 62.4 मीटर दर्ज किया गया है, जो अभी भी चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

कहा पड़ा सबसे अधिक असर

बढ़ते जलस्तर का असर शहर के कई प्रमुख घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। पक्के घाटों की सीढ़ियां धीरे-धीरे पानी में डूब रही हैं, जबकि किनारे स्थित कई छोटे-बड़े मंदिर भी जलमग्न होने लगे हैं। इसका सबसे अधिक असर मणिकर्णिका घाट स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर पर पड़ा है, जो बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गया है।

क्यो प्रसिद्ध है? रत्नेश्वर महादेव मंदिर

रत्नेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। करीब 9 डिग्री के कोण पर झुका यह मंदिर अपनी बनावट के कारण अक्सर इटली की प्रसिद्ध पीसा की झुकी मीनार से तुलना का विषय बनता है। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर यह मंदिर पानी में समा जाता है और श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से घाटों के बीच आवागमन प्रभावित हुआ है। पुरोहितों और नाविकों के अनुसार, कई घाटों का आपसी संपर्क टूटने लगा है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। गंगा में पतवार से चलने वाली नावों के संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। वहीं, मोटरबोट संचालकों को निर्धारित क्षमता से कम यात्रियों को बैठाने और सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट समेत अन्य सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। 

प्रशासन लगातार बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा और राहत संबंधी कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।