आज बनारस की यात्राओं के व्यक्तिगत वृत्तांत की ई-बुक 'BANARAS, Again' का बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुआ विमोचन...
वाराणसी, न्यूज। स्वतंत्र पत्रकार सौरभ चौहान की ई-बुक BANARAS, Again का विमोचन आज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में किया गया। यह पुस्तक अमेज़न किंडल पर उपलब्ध है और चौहान की बनारस की यात्राओं का व्यक्तिगत वृत्तांत प्रस्तुत करती है।पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि भले ही वर्षों के दौरान शहर में परिवर्तन आया हो, लेकिन उसकी मूल स्मृतियाँ और अनुभव अब भी समान बने हुए हैं। चौहान पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
इस पुस्तक का विमोचन 23 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी AI-Driven Media Ecosystems: Transforming Journalism, Public Relations, Advertising, Digital Communication and the Sustainable Media Futures के समापन सत्र में हुआ। यह संगोष्ठी हाइब्रिड माध्यम से आयोजित की गई थी।
विमोचन सत्र में संचार विशेषज्ञ एवं मीडिया शिक्षाविद् प्रो. संजीव भनावत, मुख्य कार्यकारी संपादक, Communication Today, वरिष्ठ मीडिया शिक्षाविद् अनिल उपाध्याय, प्रो. श्रीकांत पटनायक, संस्थापक निदेशक, आईआईएमटी, भुवनेश्वर, डॉ. किरण गुप्ता मित्तल, विद्यादीप विश्वविद्यालय, सूरत, गुजरात, डॉ. बाला लखेंद्र, एसोसिएट प्रोफेसर एवं आयोजन सचिव, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, बीएचयू सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विमोचन के अवसर पर चौहान ने कहा कि यह पुस्तक उनकी विभिन्न यात्राओं के दौरान देखे गए बनारस का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा, "यह एक बाहरी व्यक्ति की दृष्टि से लिखा गया वृत्तांत है, जिसकी अपनी सीमाएँ हैं। चार यात्राएँ किसी को उस शहर का विशेषज्ञ नहीं बना देतीं, जहाँ पीढ़ियों ने जीवन जिया है। लेकिन ये यात्राएँ तुलना की संभावना जरूर पैदा करती हैं।
आप उन चीज़ों को नोटिस करने लगते हैं, जिन्हें पहली बार में देख नहीं पाए थे। आप शहर के जाहिर दृश्यों से कम प्रभावित और उनके आसपास घट रही चीज़ों को लेकर अधिक जिज्ञासु होने लगते हैं। लौटकर आना और किसी शहर को जान लेना एक ही बात नहीं है।"
ई-बुक का विमोचन संगोष्ठी में समकालीन मीडिया परिदृश्य को आकार देने में तकनीक, पत्रकारिता और संचार की बदलती भूमिका पर हुई चर्चाओं का भी हिस्सा रहा। यह पुस्तक न केवल बनारस की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है, बल्कि पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डालती है।