यूपी पंचायत चुनाव को लेकर लखनऊ में बवाल, प्रदर्शनकारियों को बस में ठूंस-ठूंसकर ले गयी पुलिस...
UP Panchayat Chunav 2026: यूपी के गांवों में अगले पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रधान प्रत्याशियों का इंतजार अब गुस्से में बदलता दिखाई दे रहा है. समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर रविवार को लखनऊ में अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में संभावित प्रत्याशी सड़क पर उतर आए। दारुलशफा से विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव में देरी के खिलाफ नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक पहुंचने की कोशिश की. हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई, इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
विधानसभा की ओर बढ़े, पुलिस ने रास्ते में रोका
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पंचायत चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि गांव की स्थानीय सत्ता और प्रतिनिधित्व का सवाल है. संभावित प्रत्याशी लंबे समय से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं और तारीखों को लेकर स्थिति साफ नहीं होने से उनकी बेचैनी बढ़ रही है. दारुलशफा से विधानसभा की ओर कूच करने की कोशिश इसी नाराजगी का हिस्सा थी. प्रदर्शन के दौरान बीजेपी सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ा और पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
बसों में भरकर ईको गार्डन भेजे गए प्रदर्शनकारी
हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बैठाकर ईको गार्डन भेजने लगी. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें बसों में भरकर वहां ले जाया गया. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और पोस्ट में भी इस प्रदर्शन और हिरासत की झलक दिखाई दे रही है.जिन लोगों ने गांव में चुनाव लड़ने का सपना देखा, वे पुलिस हिरासत में पहुंचे।
इस प्रदर्शन की सबसे बेचैन करने वाली तस्वीर यही है कि जिन लोगों ने अपने गांव में प्रधान बनने के लिए महीनों से तैयारी की, वे चुनाव की तारीख पूछने के लिए राजधानी पहुंचे और विधानसभा तक पहुंचने से पहले पुलिस हिरासत में ले लिए गए. किसी ने गांव में लोगों से संपर्क शुरू किया होगा, किसी ने समर्थकों को जोड़ना शुरू किया होगा तो किसी ने चुनावी खर्च और प्रचार की तैयारी की होगी. लेकिन चुनाव कब होगा, इस पर आधिकारिक तस्वीर अब भी साफ नहीं है. यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तारीखें वायरल होती रही हैं, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल ऐसी कोई अंतिम चुनावी तारीख घोषित नहीं दिखती।
चुनाव नहीं तो वोट नहीं' की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि अगर पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराया गया तो वे विधानसभा चुनाव में भी सरकार के खिलाफ अपना रुख तय कर सकते हैं. प्रदर्शन के दौरान 'चुनाव नहीं तो वोट नहीं' जैसे नारे भी लगाए गए. यानी गांव की राजनीति का गुस्सा अब राजधानी की सड़कों तक पहुंच चुका है. यह चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंचायत चुनाव में सक्रिय रहने वाला स्थानीय नेटवर्क विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जाता है।
पंचायत चुनाव की तारीख पर अभी भी इंतजार
पंचायत चुनाव में देरी को लेकर मामला अदालत में भी पहुंचा हुआ है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनाव में देरी से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही है, इससे पहले अदालत में सरकार की ओर से नवंबर 2026 में छह महीने की अवधि पूरी होने की बात रखी गई थी. हालांकि इसे चुनाव की निश्चित तारीख नहीं माना जा सकता. सोशल मीडिया पर वायरल चुनाव कार्यक्रम को भी आधिकारिक घोषणा नहीं माना गया है।
लखनऊ का यह प्रदर्शन बताता है कि पंचायत चुनाव की तारीख अब सिर्फ सरकारी कैलेंडर का इंतजार नहीं रह गई है. गांवों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह उनके राजनीतिक भविष्य का सवाल बन चुका है. राजधानी में सड़क पर उतरे संभावित प्रत्याशियों की हिरासत इसी बढ़ते असंतोष की तस्वीर है. अब नजर इस बात पर है कि सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव को लेकर अगला स्पष्ट कदम कब उठाते हैं।