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'अब और नहीं सहेंगे सनातन का अपमान'. काशी में अखिल भारतीय संत समिति का बड़ा ऐलान... देशभर में शुरू होगा 'सनातन शंखनाद' अभियान

'अब और नहीं सहेंगे सनातन का अपमान'. काशी में अखिल भारतीय संत समिति का बड़ा ऐलान... देशभर में शुरू होगा 'सनातन शंखनाद' अभियान

वाराणसी में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय संत समिति ने सनातन धर्म और साधु-संत समाज के खिलाफ हो रहे षड्यंत्रों का कड़ा प्रतिउत्तर देने का बड़ा ऐलान किया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि सनातन विरोधी ताकतों को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसी संकल्प के साथ पूरे देश में "सनातन शंखनाद" अभियान की शुरुआत की घोषणा की गई है।

संतों की दशकों पुरानी चुप्पी टूटी

राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने इस अभियान को भगवान आदि शंकराचार्य के 'शंकर दिग्विजय' का दूसरा चरण करार दिया। उन्होंने कहा कि संतों ने अब अपनी चुप्पी तोड़ दी है और वे सनातन धर्म के हर शत्रु से पूरी सख्ती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही उन्होंने राजनीति में संतों के भगवा वस्त्रों को निशाना बनाए जाने पर तीखा रोष व्यक्त किया।

संसद परिसर की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया और कानूनी कदम

प्रेस वार्ता के दौरान जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर में हुई एक खास घटना का जिक्र करते हुए इसे भगवान राम और सनातन धर्म का अक्षम्य अपमान बताया। संत समाज ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए मांग की है कि यदि पुलिस तत्काल कार्रवाई नहीं करती है, तो संत समाज इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा। 

जानकारी के अनुसार, संत समाज द्वारा इस मामले में थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। बैठक में काशी विद्वत् परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी और विश्व हिंदू परिषद के अशोक तिवारी सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए कई प्रख्यात संत और महामंडलेश्वर उपस्थित रहे।

आगामी संस्कृति संसद का ऐलान

संत समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी 2 से 5 नवंबर तक भव्य संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत 2 नवंबर को राम मंदिर आंदोलन के कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ होगी, जिसमें देश भर से 3,000 से अधिक संत शिरकत करेंगे।