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किसी का धर्म अलग तो कोई अनजान बन रहा महिला का भाई, यूपी रोडवेज में 'फ्री सफर' के लिए पुरुष अपना रहे हैं नए-नए तरीके...

किसी का धर्म अलग तो कोई अनजान बन रहा महिला का भाई, यूपी रोडवेज में 'फ्री सफर' के लिए पुरुष अपना रहे हैं नए-नए तरीके...

सहारनपुर, न्यूज। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रक्षाबंधन पर महिलाओं को दी गई 'फ्री सहयात्री' योजना का लाभ उठाने के नाम पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। योजना के नियमों और तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर परिचालक बसों में सफर कर रहे किसी भी अनजान पुरुष यात्री को महिला का सहयात्री दर्शाकर 'शून्य मूल्य' का टिकट जारी कर रहे हैं।

इस खेल से जहां एक ओर सरकार की इस कल्याणकारी योजना की मूल भावना को ठेस पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार और परिवहन निगम को हर दिन लाखों रुपये की भारी आर्थिक चपत लगने की आशंका है। "केसरी न्यूज 24" मीडिया टीम व ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना का दुरुपयोग उन रूटों पर सबसे ज्यादा हो रहा है जहां दैनिक यात्री सफर करते हैं।

नियमानुसार यह छूट उन महिलाओं और उनके एक सहयात्री परिवार के सदस्य के लिए है जो रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राखी बांधने या त्योहार मनाने जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जो महिलाएं अपने निजी काम, कोर्ट-कचहरी, या बाजार के काम से इधर-उधर जा रही हैं, उन्हें भी इस योजना के दायरे में खींच लिया गया है।

कई सहयात्री दूसरे धर्म के भी

बस परिचालक अपनी टिकट बुकिंग की संख्या बढ़ाने या यात्रियों को अनुचित लाभ देने के लिए टिकटिंग मशीन का सहारा ले रहे हैं। जैसे ही कोई अकेली महिला बस में चढ़ती है, परिचालक उसके पीछे या आस-पास खड़े किसी भी अनजान पुरुष यात्री से उसका संबंध पूछे बिना, उसे उस महिला का 'पारिवारिक सहयात्री' दर्ज कर देता है। 

इसके बाद मशीन से पुरुष का भी शून्य रुपये का टिकट निकाल दिया जाता है। इस तरह की सुविधा लेने वाले अनेक सहयात्री दूसरे धर्म के भी हैं। इस प्रकार, टिकट के पैसे न देने के लालच में पुरुष यात्री भी परिचालक के इस खेल में सहयोगी मूकदर्शक बने रहते हैं। त्योहार के सीजन में जहां परिवहन निगम को अतिरिक्त संचालन से बंपर कमाई की उम्मीद होती है, वहीं इस फर्जीवाड़े ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।

एक ही बस में दर्जनों ऐसे 'फर्जी सहयात्री' सफर कर रहे हैं, जिनका महिला से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। यदि इस गड़बड़ी को तुरंत नहीं रोका गया, तो रक्षाबंधन के इस विशेष अभियान के बाद परिवहन निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पड़ सकता है।

परिचालकों के पास नहीं है कोई विकल्प

इस मामले में सजग नागरिकों व्यापार मंडल अध्यक्ष मांगेराम शर्मा, दैनिक यात्री वीरेंद्र सिंह, गौ रक्षा दल के अध्यक्ष सोना पंडित और कुछ रोडवेज कर्मियों का कहना है कि जब तक सहयात्री के लिए परिवार का कोई पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या राशन कार्ड अनिवार्य नहीं किया जाएगा, तब तक इस फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाना संभव नहीं है।

छुटमलपुर परिवहन निगम डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सहेंद्र सिंह का कहना है कि रक्षाबंधन योजना के तहत केवल पात्र और वास्तविक पारिवारिक सहयात्रियों को ही निश्शुल्क यात्रा का प्रावधान है। यदि किसी बस में परिचालक द्वारा किसी भी अनजान पुरुष को सहयात्री बताकर शून्य टिकट जारी करने का मामला सामने आता है तो कार्रवाई होगी।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी मार्गों पर चेकिंग की जा रही है तथा उड़न दोस्तों का भी गठन किया गया है जिनके द्वारा नियमित चेकिंग की जा रही है। हालांकि अधिकारी का कहना है कि किसी महिला द्वारा किसी व्यक्ति को अपना सहयात्री बताने पर परिचालक के पास शून्य मूल्य टिकट काटने के सिवाय अन्य कोई विकल्प नहीं है।