Explainer: अमेठी हारीं, फिर भी BJP में बढ़ा कद! नितिन नबीन की टीम में स्मृति ईरानी की वापसी के पीछे क्या है बड़ा सियासी प्लान?...
भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार अपने नए संगठन का ऐलान कर दिया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को नई टीम की घोषणा की जिसमें कई पुराने चेहरों के साथ कुछ अहम वापसी भी हुई है। नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की हो रही है। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद अब उन्हें BJP के राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। यानी चुनावी हार के बाद भी पार्टी ने उन्हें संगठन की अहम भूमिका में वापस लाने का फैसला किया है।
क्या स्मृति ईरानी की वापसी सिर्फ संगठन में वापसी है?
इसे सिर्फ एक संगठनात्मक नियुक्ति मानना शायद संपूर्ण नहीं होगा. ये इससे आगे की बात है. दरअसल, स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी से राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चेहरा बनी थीं. लेकिन 2024 में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें 1,67,196 वोटों से हरा दिया था. इसके बावजूद BJP ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर फिर महत्वपूर्ण भूमिका दी है. यह संकेत इसलिए भी अहम है क्योंकि 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. BJP के लिए यूपी सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मैदानों में से एक है पार्टी संगठन पहले से ही राज्य में चुनावी तैयारियों को तेज कर रहा है।
क्या स्मृति ईरानी को यूपी के लिए इस्तेमाल करेगी BJP?
अभी पार्टी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है कि स्मृति ईरानी को यूपी का प्रभारी बनाया गया है. लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश खासकर अमेठी से जुड़ा रहा है. ऐसे में राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर उनकी भूमिका को यूपी के चुनावी नैरेटिव से जोड़कर देखा जाना स्वाभाविक है. खास बात यह है कि नितिन नबीन खुद यूपी के सांसदों के साथ बैठक कर चुके हैं. इन बैठकों में 2027 के चुनाव को लेकर जातीय समीकरण पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है।
2024 की हार के बाद स्मृति को फिर इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों?
स्मृति ईरानी की कहानी BJP में थोड़ी अलग रही है. दरअसल, 2019 में अमेठी में राहुल गांधी को हराने के बाद वह BJP के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हुई थीं. 2024 में उनकी हार बड़ी राजनीतिक खबर बनी लेकिन उसके बाद भी पार्टी ने उन्हें संगठन से बाहर नहीं रखा. अब राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलने का मतलब है कि पार्टी उनके राजनीतिक अनुभव संगठनात्मक क्षमता का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर करना चाहती है. इसे इस तरह भी समझ सकते हैं अमेठी का चुनाव हारने के बाद स्मृति ईरानी की चुनावी राजनीति भले बदली हो लेकिन BJP के संगठन में उनकी उपयोगिता खत्म नहीं हुई।
नितिन नबीन की टीम में कौन-कौन से बड़े चेहरे हैं?
नई टीम सिर्फ स्मृति ईरानी की वापसी तक सीमित नहीं है. इसके अलावा पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, तीरथ सिंह रावत समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. राष्ट्रीय महामंत्रियों की सूची में स्मृति ईरानी के साथ विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी संजय भाटिया को जगह मिली है. इससे साफ है कि नबीन ने टीम में अनुभव संगठन दोनों को साथ रखने की कोशिश की है।
BJP के ‘खजाने’ की चाबी फिर पीयूष गोयल को क्यों?
नई टीम की एक नियुक्ति राजनीतिक तौर पर काफी अहम है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को BJP का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है. उनके साथ राजेश मंगल को संयुक्त कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. गोयल इससे पहले भी BJP के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं. राजनीति के साथ वित्तीय कॉरपोरेट क्षेत्र की उनकी पृष्ठभूमि को देखते हुए यह नियुक्ति संगठन के वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है. यानी नितिन नबीन की टीम में सिर्फ चुनावी चेहरों को जगह नहीं मिली बल्कि संगठन के अलग-अलग हिस्सों के लिए अनुभवी लोगों को भी जिम्मेदारी दी गई है।।
क्या यह टीम 2027 के चुनावों की तैयारी है?
सीधे तौर पर पार्टी ने नई टीम को 2027 के चुनावों की टीम नहीं बताया है लेकिन समय जरूर बहुत कुछ कहता है. 2027 में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. BJP के सामने संगठन को मजबूत करने राज्यों में तालमेल बढ़ाने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की चुनौती है. नितिन नबीन के यूपी को लेकर हालिया सक्रियता को भी इसी व्यापक राजनीतिक तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है. पार्टी ने यूपी में जातीय समीकरण जमीनी संगठन की स्थिति को लेकर फीडबैक जुटाना शुरू किया है।
क्या नबीन ने पुराने नए चेहरों के बीच बैलेंस बनाया?
नई टीम को देखें तो इसका जवाब काफी हद तक हां में नजर आता है. एक तरफ वसुंधरा राजे, राम माधव तीरथ सिंह रावत जैसे अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. दूसरी तरफ स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सुनील बंसल अन्य नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री की भूमिका दी गई है. यानी नितिन नबीन ने पूरी तरह पुराने चेहरों को हटाने के बजाय अनुभवी नेताओं संगठन में सक्रिय चेहरों का मिश्रण तैयार किया है।
स्मृति ईरानी के लिए आगे क्या रास्ता खुला?
सबसे बड़ा सवाल यही है. क्या वह सिर्फ दिल्ली में BJP के राष्ट्रीय संगठन का काम संभालेंगी या फिर आने वाले विधानसभा चुनावों में किसी राज्य की जिम्मेदारी भी उन्हें मिल सकती है? फिलहाल इसका आधिकारिक जवाब नहीं है. लेकिन उत्तर प्रदेश से उनका पुराना रिश्ता, अमेठी में उनकी राजनीतिक पहचान राष्ट्रीय महामंत्री की नई जिम्मेदारी उन्हें आने वाले चुनावी अभियान में उपयोगी चेहरा बना सकती है. यही वजह है कि 2024 में अमेठी की हार के करीब दो साल बाद उनकी BJP संगठन में वापसी को सामान्य नियुक्ति के बजाय राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
नितिन नबीन की नई टीम का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
नई टीम से एक बात स्पष्ट है कि BJP ने संगठन में बदलाव की शुरुआत कर दी है। टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 राष्ट्रीय महामंत्री नए कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। इस पूरी कवायद में दो नाम खास तौर पर ध्यान खींचते हैं वे हैं स्मृति ईरानी पीयूष गोयल. एक तरफ अमेठी की हार के बाद स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी भूमिका देकर BJP ने यह संदेश दिया है कि एक चुनावी हार से उनका राजनीतिक सफर खत्म नहीं हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ पीयूष गोयल को फिर पार्टी के खजाने की जिम्मेदारी देकर संगठन ने अनुभवी हाथों पर भरोसा जताया है।
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