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चित्रकूट में उफनती मंदाकिनी का कहर: एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों और SDRF ने दर्जनों पर्यटकों व ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला

चित्रकूट में उफनती मंदाकिनी का कहर: एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों और SDRF ने दर्जनों पर्यटकों व ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला


चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। तटीय इलाकों, होटलों और मकानों में पानी भर जाने से कई पर्यटक और स्थानीय निवासी फंस गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF) और भारतीय वायुसेना (Air Force) ने मोर्चा संभाला और संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

मंदाकिनी नदी में आए उफान के कारण रामघाट गेट नंबर एक के पास स्थित होटल पुष्पा में कानपुर से आए कई पर्यटक फंस गए थे। वहीं, विनोद लाज के पीछे बने एक मकान में भी लगभग 10 पर्यटक फंस गए। इसके अलावा मंधना-बिठूर से चित्रकूट घूमने आए प्रफुल्ल तिवारी, सानू तिवारी, प्रिंशु तिवारी, विवेक शुक्ला, राजा त्रिवेदी, आलोक बाथम और टांगी भी बाढ़ के पानी में घिर गए थे।  

जलस्तर इतना बढ़ गया कि मकानों की पहली मंजिल पूरी तरह डूब गई और लोग छतों पर शरण लेने के लिए मजबूर हो गए। इसके बाद एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट कर पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया।  

पानी के तेज बहाव के बीच पहली मंजिल डूब जाने के बाद छतों पर फंसे परिवारों ने सहायता की गुहार लगाई। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकालना राहत और बचाव टीमों के लिए काफी जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।  

एसडीएम अजय यादव ने बताया कि नदी के उफान और तेज बहाव को देखते हुए जालौन से SDRF की टीम को मोटरबोट के साथ विशेष रूप से बुलाया गया है। सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है और लोगों को राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है।  

क्षेत्र में NDRF, SDRF और PAC की कुल 10 टीमें राहत कार्य में जुटी हुई हैं। रामघाट सहित आसपास के लगभग पांच गांव इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गोबरिया क्षेत्र में भी फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीमें लगातार काम कर रही हैं। डोंडा बांध में पानी का स्तर कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन प्रशासन लगातार अलर्ट पर है।  

प्रशासन का कहना है कि पानी उतरने के बावजूद मिट्टी धंसने और पुराने मकानों के ढहने का खतरा अभी बना हुआ है।  

जिलाधिकारी (डीएम) पुलकित गर्ग ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा पहले ही चेतावनी जारी कर दी गई थी। इसके चलते अधिकांश लोग समय रहते अपने मकान व होटल खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। हालांकि, कुछ लोग अपना सामान बचाने के चक्कर में या अन्य कारणों से इमारतों की ऊपरी मंजिलों में रुके रह गए थे, जिन्हें निकालने के लिए SDRF और पुलिस की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।