नेपाल की तबाही में 1000 लोगों की मौत, 1 ही घर में मिले 23 शव, सुरंगों में फंसे लोगों को अब निकालने में जुटा प्रशासन...
नेपाल में बाढ़ से मची तबाही में फंसे लोगों को अब तक पूरी तरह से निकाला नहीं जा सका है. यहां हर घंटे लोगों की लाशें मिल रही हैं. लोग अपनों की तलाश में दर दर भटक रहे हैं. इसी बीच बाढ़ की चपेट में आये बाढ़ग्रस्त नुवाकोट के एक ही घर से कम से कम 23 शव बरामद किये गये हैं, अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या अब तक 1,000 के पास पहुंच गई है.वहीं करीब 4,000 से भी ज्यादा लोग लापता हैं. बचावकर्मी पिछले 6 दिनों से जलविद्युत सुरंगों में फंसे 900 से ज्यादा श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें भारी कीचड़ और खराब मौसम बाधा बन रहा है।
सुरंगों के भीतर जिंदगी और मौत की जंग
इस त्रासदी का सबसे डरावना पहलू यह है कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों के अंदर 900 से ज्यादा मजदूरों और कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है. भारी कीचड़, मलबा और खराब मौसम रेस्क्यू टीमों के रास्ते का सबसे बड़ा कांटा बन गये हैं. जरा सोचिए, उन अंधेरी सुरंगों में फंसे लोगों का वक्त किस कत्लगाह की तरह गुजर रहा होगा, जहां ऑक्सीजन और मदद की उम्मीद हर सेकंड धुंधली पड़ रही है. लोग लगातार बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. वहीं हजारों लोग अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
बुनियादी ढांचे का तहस-नहस और आम जनजीवन पर मार
यह आपदा सिर्फ जानमाल के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने नेपाल की रीढ़ यानी वहां के ट्रांसपोर्ट और बिजली सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. नदियां अपने साथ पुल, सड़कें और गाड़ियां ऐसे बहा ले गईं जैसे वे खिलौने हों, हालात इतने बदतर हैं कि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि प्रभावित इलाकों में करीब 65,000 लोगों को तुरंत पीने के पानी, साफ-सफाई और मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है।
हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का गंभीर संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर का खिसकना इस बात का सबूत है कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण बहुत ज्यादा संवेदनशील हो चुके हैं. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पहाड़ों के भीतर बन रहे अनकहे खतरे बिना किसी चेतावनी के अचानक फट पड़ते हैं, जिससे पारंपरिक आपदा प्रबंधन प्रणालियां पूरी तरह फेल साबित हो रही हैं।
अभी तक सुंरगों में फंसे हैं 933 लोग
रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल के बाढ़ प्रभावित जिले रसुवा और नुवाकोट करीब आधा दर्जन सुरंगों में 933 श्रमिक फंसे हुए हैं. इनमें बहुत से लापता हो गये हैं. वहीं बहुत ज्यादा कीचड़ और अवरुद्ध सुरंगों के कारण बचाव अभियान बहुत मुश्किल हो गया है. वहीं 11 परियोजनाओं में शामिल त्रिशुली 3ए जलविद्युत परियोजना में छठे दिन भी बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका. यहां बाढ़ आने के समय करीब 40 से 42 इंजीनियर काम कर रहे थे. इसके साथ ही बहुत से मजदूर थे. उनमें से 118 मजदूर लापता हैं. नेपाल सेना की टीमें नियंत्रित विस्फोटों, उत्खनन मशीनों और सर्चलाइटों की मदद से सुरंगों में घुसे पानी और कीचड़ को हटाने में जुटी हैं, ताकि इसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला जा सकें।
नेपाल ने की इन उपकरणों की मांग
बाढ़ प्रभावित नेपाल ने पड़ोसी देशों से मदद मागी है. उसने भारत से लेकर चीन, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर से ड्रोन, ब्रिज यूनिट से लेकर लिडार, फ्रीजर और डीएनए किट मांगी हैं. इसके अलावा राहत सामग्री भी मांगी गई हैं. भारत अब तक नेपाल में दो बार राहत सामग्री व जरूरी चीजें भेज चुका है. इसके अलावा पड़ोसी देश भी नेपाल में राहत सामग्री भेज रहे हैं।