Headlines
Loading...
पूर्व डीजीपी मैथिली शरण गुप्त की नई पहल: 'इलेक्शन ऐप' से चुनाव कराने का प्रस्ताव, कहा- बचेंगे देश के 2 लाख करोड़ रुपये...

पूर्व डीजीपी मैथिली शरण गुप्त की नई पहल: 'इलेक्शन ऐप' से चुनाव कराने का प्रस्ताव, कहा- बचेंगे देश के 2 लाख करोड़ रुपये...


भोपाल ( केसरी न्यूज 24 न्यूज डेस्क ):मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मैथिली शरण गुप्त ने देश की चुनाव प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव का विचार साझा किया है। उन्होंने नागरिकों से 'इलेक्शन ऐप' (Election App) के माध्यम से चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करने की अपील की है। 

उनका दावा है कि इस तकनीक को अपनाने से न केवल चुनाव में होने वाली गड़बड़ियों पर पूर्ण विराम लगेगा, बल्कि देश के करीब 2 लाख करोड़ रुपये भी बचेंगे।
पारदर्शी चुनाव और डिजिटल ट्रेल का दावा
अपने 'क्राइम फ्री भारत' (Crime Free Bharat) अभियान के तहत जारी एक संदेश में पूर्व डीजीपी ने कहा है कि इस ऐप के जरिए होने वाले चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी होंगे। उन्होंने दावा किया है कि इस प्रणाली के लागू होने के बाद किसी भी स्तर पर—चाहे वह चुनाव आयोग हो या सत्तासीन सरकार—चुनावों में कोई हेरफेर नहीं किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था में डिजिटल ट्रेल के साथ-साथ पेपर ट्रेल की भी पुख्ता सुविधा होगी।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस नई प्रणाली को लागू करने में कुछ तकनीकी, कानूनी या संवैधानिक चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया है कि हम इन समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।

'क्राइम फ्री भारत' और 5 नए मौलिक अधिकार

मैथिली शरण गुप्त का यह विजन केवल चुनाव सुधारों तक सीमित नहीं है। वे 'अपराध एवं भ्रष्टाचार मुक्त भारत' और 'साइबर अपराध मुक्त भारत' के निर्माण की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

 उन्होंने एक ऐसे मॉडल का प्रस्ताव रखा है जिसमें नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के पास जाने या सरकारी धन की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके साथ ही, उन्होंने देशवासियों के लिए शिक्षा, रोजगार, जैविक (ऑर्गेनिक) भोजन, स्वास्थ्य, मकान और समृद्धि को नए 'मौलिक अधिकारों' के रूप में स्थापित करने की बात कही है। उनका कहना है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए लोगों को केवल अपने पेशे या समान चाहत वाले लोगों का एक 'संकल्प समूह' बनाना होगा।


पूर्व डीजीपी ने अपने विजन को विस्तार से समझाने के लिए यूट्यूब (YouTube) का सहारा लिया है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे तकनीक और चुनाव सुधार वाले उनके वीडियो देखें और 'क्राइम फ्री भारत' यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें ताकि वे इस मॉडल को गहराई से समझ सकें।

उन्होंने अपनी इस मुहिम को जन-आंदोलन बनाने के लिए अपना मोबाइल नंबर (9425606040) भी सार्वजनिक किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी आपातकाल या अधिक जानकारी के लिए इस नंबर को सेव करें और सुविधानुसार उनसे संपर्क करें।

हालांकि देश की मौजूदा चुनाव प्रणाली की जगह एक मोबाइल ऐप को कानूनी और संवैधानिक मान्यता मिलना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन पूर्व डीजीपी के इस विचार ने डिजिटल युग में चुनाव सुधारों को लेकर एक नई बहस को जरूर जन्म दे दिया है।
- चीफ एडिटर :: ए. के. केसरी