308 पहिये, 5 km/h की रफ्तार, बेल्जियम से चंदौली/वाराणसी पहुँचा वेसल रास्ता देने के लिए तोड़े जा रहे बिजली के खंभे और एंट्री गेट...
चंदौली/वाराणसी न्यूज। बेल्जियम से समुद्र के रास्ते उड़ीसा के पारादीप पोर्ट पहुंचा बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी लखीमपुर के लिए औद्योगिक बायलर यूपी की सीमा में पहुंच गया है। चंदौली और वाराणसी से होकर बलरामपुर होते हुए लखीमपुर जाएगा।308 पहियों वाले हाइड्रोलिक ट्रक पर भारी भरकम वेसल (औद्योगिक बायलर या रिएक्टर वेसल) को रखकर लाया जा रहा है।
एक घंटे में पांच किमी की दूरी तय करता है। इससे वजन और लंबाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही नहीं, जिस जिले से होकर इस ट्रक को निकलना है, वहां के प्रशासन को पहले से सूचना दे दी जाती है। वहां का स्थानीय प्रशासन उसके सकुशल निकलने के लिए आवश्यकता पड़ने पर प्रवेश द्वार, बिजली तार और खंभा हटाने के साथ सड़कें भी बनवाई जाती हैं।
विशेषज्ञों की टीम भी चल रही साथचीनी मिल के वेलफेयर अधिकारी शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि शुक्रवार को चंदौली पहुंचा है। बलरामपुर पहुंचने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा, क्याेंकि एक दिन चंदौली और वाराणसी में रुकेगा। ट्रक के साथ विशेषज्ञों की टीम भी चल रही है।
बताया कि बलरामपुर चीनी मिल लि. गन्ने से पर्यावरण के अनुकूल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (पीएलए) और को-पालिमर के निर्माण व अनुसंधान के लिए प्लांट लखीमपुर के कुंभी यूनिट में स्थापित कर रही है। इसमें कुल 100 करोड़ की लागत आएगी। यह देश का पहला प्लांट है। यहां 100 टन प्रति वर्ष उत्पादन किया जाएगा।
इसी स्थान पर एक और बड़ा प्लांट स्थापित कर रही है। तीन हजार करोड़ से अधिक के निवेश से तैयार हो रहे प्लांट से 80 हजार टन प्रतिवर्ष उत्पादन होगा। बताया कि गन्ने से ही प्लास्टिक तैयार किया जाएगा। गन्ने से चीनी और उसके अवशेष को सूक्ष्म जीवों के माध्यम से पहले लैक्टिक एसिड में बदला जाएगा।
फिर रासायनिक प्रक्रिया से पालीलैक्टिक एसिड में परिवर्तित करके बायोप्लास्टिक बनाया जाएगा, जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल रहेगा। पारंपरिक प्लास्टिक जहां नष्ट नहीं होता है, वहीं, यह डिस्पोज होकर कचरा और फिर खाद बन जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बनेगा।