स्मृति ईरानी ने 40 साल पहले पिता को दिया था एक वचन, अब बोलीं- 2024 नहीं हारती तो पूरा नहीं होता...
भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी की कुछ समय पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठन में दमदार वापसी हुई हैं। 2024 का अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद करीब दो साल तक सुर्खियों से लगभग बाहर रहीं स्मृति को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में महासचिव बनाया गया है। स्मृति ने एक हालिया इंटरव्यू में बताया है कि उन्होंने 40 साल पहले अपने पिता को एक वचन दिया था, अगर 2024 में अमेठी से उनकी हार नहीं होती, तो वे उस अपने वचन को पुरा नहीं कर पातीं।
मीडिया को दिए गए इंटरव्यू' में स्मृति ईरानी ने अपने पुराने वचन को याद किया। उन्होंने कहा, ''जब मैं चुनाव हारी तो बैठकर टटोला कि जिंदगी में क्या-क्या बोला जो नहीं कर पाई। जब मैं बच्ची थी, तब मेरे पिता शांति निकेतन की सड़क पर किताब बेचते थे 40 साल पहले। इसके साथ ही, धौलाकुआं के बस अड्डे पर शाम को किताब बेचते थे। कबाड़ से सेकंड हैंड किताब लेते थे और उन्हें बेचते। वे कहते थे कि यहां पर अमीरों के स्टाफ मेंबर्स खरीदते हैं। मुझे याद है कि सेकंड हैंड टाइम्स मैग्जीन ली जाती थी। धौलाकुआं वाले बस अड्डे से मजदूर जाते थे।''
भाजपा नेता ने आगे बताया, ''मैंने एक दिन उनसे कहा कि जहां ये अंग्रेज वाले पढ़ते हैं, वहां मेरा एक दिन घर हो तो? मेरे पिता ने कुछ नहीं कहा। जब मैं चुनाव हार गई तो मुझे याद था कि प्रधानमंत्री का नियम है कि सरकारी आवास जल्दी छोड़ने का। तो मैंने एक कार्यकर्ता से कहा कि भाई एक जुगाड़ करके घर दिखा दो। वहां शिफ्ट होना है। उसने कहा कि दो-तीन घर देखते हैं।''
ईरानी ने बताया कि मैं एक घर में गई, वह अंडर कंस्ट्रक्शन था, लेकिन मैंने कहा कि मुझे यहीं शिफ्ट होना है। जब मैं घर में शिफ्ट हो रही थी, तो मैंने अपने पिता को बुलाया। वह गेट पर खड़े थे और रोने लगे, क्योंकि उनके विपरीत दिशा में वह सड़क थी, जहां पर वह किताब बेचा करते थे।'' स्मृति ईरानी ने कहा कि अगर मैं 2024 का चुनाव नहीं हारती तो जो पिता को 40 साल पहले वचन दिया था, वह पूरा नहीं कर पाती। मैंने भगवान से उस घर के मंदिर में बैठकर कहा कि अगर भगवान ने मुझे बुरे दिन दिखाए होते, तो पिता को 40 साल पहले दिया वचन पूरा करने की मेरी औकात नहीं होती।
अमेठी से 24 में चुनाव हार गईं स्मृति ईरानी
बता दें कि 2014 में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गई थीं। इसके बाद, 2019 में वह फिर से राहुल के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरीं और शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीटें गांधी परिवार का गढ़ रही हैं और परिवार के कई सदस्य यहां से चुनाव लड़ते रहे हैं। इसके बाद, फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़े और लंबे समय तक सोनिया गांधी के राजनीतिक प्रतिनिधि के तौर पर काम करने वाले किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से लड़ाया गया। रायबरेली से राहुल की जीत हुई तो अमेठी से स्मृति को किशोरी लाल शर्मा ने बड़े मार्जिन से चुनाव हरा दिया।