कानपुर बॉर्डर पर बनेंगे 5 भव्य एंट्री गेट, अब हर रूट पर दिखेगी अलग संस्कृति और इतिहास...
कानपुर जिला ब्यूरो। कानपुर की सीमा में प्रवेश करते ही लोगों को भव्य नजारा दिखेगा। प्रयागराज, अलीगढ़, आगरा, हमीरपुर और लखनऊ-बैराज मार्ग का शानदार गेट-वे बनेगा। हर रूट का गेट-वे अलग-अलग थीम पर होगा।
किसी रूट पर आपको ईस्ट का मैनचेस्टर दिखेगा तो किसी रूट पर कानपुर में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास नजर आएगा। कहीं शिक्षा का हब दर्शाता शहर दिखाई देगा तो कहीं नजर आएगा गंगाजी का स्वरूप। इसके लिए नगर निगम 24 करोड़ खर्च करने जा रहा है। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। टेंडर की भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अभी तक शहर में एक ही इंट्री गेट है जिसका निर्माण तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इच्छा पर केडीए ने किया था। लखनऊ से आने वाले रूट पर जाजमऊ गंगा पुल की तरफ से यह गेट बना है जिस पर 13 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। पहली बार नगर निगम ने अपनी सीमाओं को सजाने और गेट-वे के जरिए शहर की खासियत, संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को दर्शाने की तैयारी की है।
इस परियोजना के पीछे शहर में प्रवेश करते ही इसकी संक्षिप्त झलक गेट-वे के जरिए दिखाने और लोगों को सुखद अहसास कराने की है। अगले महीने तक टेंडर का वर्क ऑर्डर जारी हो जाने की उम्मीद है। शासन के निर्देश पर इसका खाका नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने तैयार कराया है।
रूमा इंट्री गेट, प्रयागराज रूट
यह रूट प्रयागराज के साथ ही वाराणसी का भी है। लिहाजा इसे काशी की वास्तुकला को कानपुर के उद्योगों से जोड़ते हुए दर्शाया जाएगा। इस गेट-वे पर दोनों तरफ तीस मीटर लंबी दीवार होगी। इस पर टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और लेदर इंडस्ट्री की झलक नजर आएगी। डिवाइडर के दोनों तरफ 10-10 मीटर की रोड होगी। इसके किसानों पर खूबसूरत पौधे नजर आएंगे।
हमीरपुर रोड गेट-वे
यह गेट-वे नाना साहेब पेशवा के नाम समर्पित होगा। इस पर 1857 की क्रांति नजर आएगी। 23 मीटर के सेंट्रल पैनल में नाना साहेब होंगे जबकि फाइनल पैनल में स्वतंत्रता की थीम नजर आएगी जिसमें कई नेता नजर आएंगे। पहला पैनल सात मीटर चौड़ा होगा जिस पर कानपुर की पहचान दर्शायी जाएगी। यह गेट-वे पूरे 34.5 मीटर का होगा। इसमें छह मीटर ऊंची वास्तुकला की दीवार होगी।
भौंती गेट-वे, इटावा हाईवे
यह गेट-वे सांस्कृतिक, पौराणिक और धार्मिक दरबार की तरह होगा। इसे मथुरा और वृंदावन से जोड़ते हुए भगवान श्रीकृष्ण की नगरी की झलक दर्शायी जाएगी। मोर का पंख नजर आएगा। गेट के बायीं तरफ कानपुर के संस्थापक राजा हिंदू सिंह द्वार अंकित होगा। अर्द्ध चंद्राकार गेट के सबसे ऊपर 'कानपुर-मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट' अंकित होगा। उद्योग और संस्कृति की झलक होगी।
गंगा बैराज वेलकम इंट्री गेट
इसका निर्माण गंगा बैराज स्थित सीतापुर-कानपुर हाईवे पर होगा। यह एक तरह से गंगा की तरफ से शहर में प्रवेश करने का स्वागत द्वार होगा। इस पर जो दीवार बनेगी वो गंगा की लहरों की तरह नजर आएगी। गेटवे पर बड़े अक्षरों में अंकित होगा-'सिटी ऑफ गंगा' इसके जरिए कानपुर से गंगा और गंगा से कानपुर के जुड़ाव को झलकाया जाएगा। इस पर बिठूर घाट की बारीक नक्काशी भी दिखेगी।
नारामऊ गेट, जीटी रोड
इस गेट-वे को कानपुर के नवाचार, अनुसंधान प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विकास के केंद्र के रूप में उभरते हुए दर्शाया जाएगा। आईआईटी कानपुर, रक्षा औद्योगिक गलियारा और स्मार्ट सिटी की पहल इस पर दिखेगी। इस प्रवेश द्वार पर आपको कानपुर की प्रगति और उत्कृष्टता का भी समावेश भी नजर आएगा। यह कानपुर द्वारा उठाए गए साहसिक नवाचार के कदमों को प्रदर्शित करेगा।