'मरना है तो मरो.', यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में सिगरेट पीते ड्राइवर ने यात्रियों की शिकायत पर भी नहीं रोकी गाड़ी; 9 जिंदगियां हुई खत्म...
Yamuna Expressway Bus Accident: यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद का मंजर भयावह था। करीब दो घंटे तक लपटें तांडव मचाती रहीं। आग बुझाने के बादजब बचाव दल ने कटर से बस का पिछला हिस्सा काटकर भीतर प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था।
तीन यात्रियों की झुलसी हुई चमड़ी सीटों से चिपकी दिखी। कई शवों की स्थिति फर्श और गैलरी में इस तरह से थी कि उन्हें समेट कर निकाला जा सका। बचाव टीम को एक एक शव निकालने में काफी समय लग गया। कई मृतकों के सीने और पैरों से पिघले हुए मोबाइल चिपके मिले। सीटों पर उनके सामान जले पड़े मिले।
नोएडा के पोस्टमार्टम हाउस में शवों की तलाश में परिजन भटकते दिखे। बिलखती युवती आयुषी ने सिर्फ एक पायल को देखकर अपनी नानी ऊषा देवी की शिनाख्त की, जो इस हादसे में जान गंवाने वाली अकेली महिला थीं। इस पूरे दर्दनाक हादसे के पीछे बस कर्मी की लापरवाही की बात सामने आ रही है।
केबिन में बैठकर सिगरेट पी रहा था ड्राइवर
हमीरपुर निवासी सुनील कुमार जो कश्मीरी गेट से इस बस में सवार हुए थे, उन्होंने जेवर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनके अनुसार मेरी बातों को चालक ने तवज्जो देने के बजाय दोनों केबिन में बैठकर सिगरेट पीने लगे। देखते ही देखते चालक सीट के पास से आग की भयंकर लपटें उठने लगीं।
यात्रियों द्वारा चीख-पुकार मचाने पर भी बस नहीं रोकी गई, उल्टा बस कर्मी ने यात्रियों को डांटते हुए कहा कि 'मरना है तो मरो, बस नहीं रुकेगी'। जब आग पूरी बस में फैल गई और अंदर दम घोटने वाला धुआं भर गया, तब जाकर चालक ने गाड़ी रोकी। जान बचाने की जद्दोजहद में कई यात्री खिड़कियां तोड़कर बाहर कूद पड़े।
नंगे पैर धुक्का-मुक्की से बचाई जान
इन्हीं यात्रियों में शामिल रिंकी राजपूत नंगे पैर ही किसी तरह धक्का-मुक्की के बीच बाहर निकल सकीं, जबकि यात्री राजू खिड़की से कूदने के दौरान चोटिल हो गए। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली दास्तान जेवर के आरोग्य अस्पताल में भर्ती रेखा भारद्वाज की है।
दिल्ली से अपने पति देवेंद्र भारद्वाज के साथ लौट रही रेखा ने रोते हुए बताया कि भगदड़ के दौरान लोग उन्हें कुचलते हुए भाग रहे थे। सिर में चोट लगने के कारण वह नीचे गिर गर्इं। उनके पति के एक पैर में फ्रैक्चर था, जिस वजह से वह उठकर भागने में असमर्थ थे। रेखा को तो किसी तरह किसी ने बाहर खींच लिया और पुलिस ने अस्पताल पहुंचा दिया, लेकिन उनके पति आग की लपटों के बीच ही फंसकर रह गए।
बस में रखा था सिलेंडर
नोएडा के सेक्टर-37 से अपनी मां सरोज गुप्ता और भाई मयंक को बस में बिठाने वाले शिवम और नयनसी सुबह से अपने अपनों की एक खबर पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। रात 11 बजे मयंक का फोन आया था, लेकिन धीमी आवाज के बीच संपर्क हमेशा के लिए टूट गया और फोन बंद हो गया। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से लिपटकर रोते हुए बस किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे हैं।
इस बीच बस की डिग्गी से एक सिलेंडर और भारी मात्रा में नेल पालिश भी बरामद हुई है, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। वहीं शवों के इस कदर पहचान योग्य न रहने के कारण अब डीएनए जांच के जरिए ही उनकी आधिकारिक शिनाख्त कराई जाएगी, जिसके बाद ही अवशेष परिजनों को सौंपे जाएंगे।
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात एक बड़ा हादसा हो गया। यात्रियों से भरी एक स्लीपर AC बस में अचानक आग लग गई। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। बस में करीब 35 यात्री सवार थे और यह नोएडा से महोबा जा रही थी। हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास हुआ।