अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में आचार्यत्व को उपयुक्त स्थान पर सार्थकता से जोड़ें : बीएचयू कुलपति...
वाराणसी,न्यूज 4 सितंबर।अंतरविश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में शुक्रवार को 'आचार्यत्व : प्रज्ञा में प्रतिष्ठित' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पिछले सौ वर्षों से हम सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।
ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि इस व्यापक शैक्षिक लक्ष्य में 'आचार्यत्व' की अवधारणा किस प्रकार और कहां प्रभावी रूप से समाहित हो सकती है। उन्होंने कहा कि आचार्यत्व को प्रत्येक उपयुक्त स्थान पर, जहां वास्तव में इसकी आवश्यकता हो, सार्थक रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
इसे अनावश्यक रूप से या केवल औपचारिकता के लिए कहीं भी समाहित करने की आवश्यकता नहीं है। आचार्यत्व का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब इसका समुचित उपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोग इसके लाभ से परिचित और लाभान्वित हो सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह और स्वागत डीन प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर शिक्षक सम्मान में बीएचयू की प्रो. मधुलिका अग्रवाल, पूर्व कुलपति प्रो. कल्पलता पाण्डेय, और गोविंद बाबा को सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने 'प्रैक्टिस टू पॉलिसी: केस स्टडीज़ ऑन एनईपी 2020' नामक पुस्तक का भी लोकार्पण किया। इसके प्रमुख संपादक प्रो. प्रेम नारायण सिंह, संपादक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार सिंह और दीप्ति गुप्ता हैं।
प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने शिक्षक एवं विद्यार्थी के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को जरूरी बताया है। प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने आचार्य के पारंपरिक गुणों को आत्मसात करने पर बल दिया। द्वितीय सत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रो. पवन कुमार शर्मा ने 'द आचार्याज़ रोल इन द एज ऑफ एआई: कल्टिवेटिंग एम्पैथी, एथिक्स, एंड ह्यूमन कनेक्शन' विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि आचार्यत्व शब्द 'आचरण' से बना है और शिक्षक शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इस दौरान पुस्तकालयाध्यक्ष सीडी राणा के नेतृत्व में एक पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया। संगोष्ठी में 10 राज्यों से 50 से अधिक शिक्षक सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किया।